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    विश्व संस्कृत दिवस पर स्वस्तिवाचनम् के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डाक विभाग ने जारी किया विशेष आवरण

    2 hours ago

    नई दिल्ली

    विश्व संस्कृत दिवस के पावन अवसर पर स्वस्तिवाचनम् की स्थापना के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग द्वारा एक विशेष आवरण (स्पेशल कवर) जारी किया गया। यह विशेष आवरण नई दिल्ली स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में आयोजित गरिमामय समारोह में जारी किया गया।

    इस विशिष्ट फिलाटेलिक समारोह में प्रख्यात आध्यात्मिक संतों, कुलपतियों, संस्कृत विद्वानों तथा सांस्कृतिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों ने सहभागिता की। समारोह में श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी, पीठाधीश्वर, पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी, कर्नाटक, प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन, प्रो. आर. जी. मुरली कृष्ण, कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, हरीश चंद्र जोशी, न्यासी एवं अध्यक्ष, स्वस्तिवाचनम्; डॉ. शुभश्री पाणिग्रही, संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं प्रोग्रामिंग), संसद टीवी; डॉ. आर. विट्टोबाचार, प्राचार्य, वेदव्यास गुरुकुलम् एवं निदेशक, वैदिक-वेदान्तिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान,डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अनेक विशिष्ट संस्कृत विद्वान उपस्थित रहे।

    नई दिल्ली के संसद मार्ग प्रधान डाकघर के वरिष्ठ पोस्टमास्टर इन्द्रेश कुमार वर्मा ने औपचारिक रूप से इस विशेष आवरण एवं कैंसिलेशन का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने समारोह में सहभागिता करते हुए इसे सांस्कृतिक, अकादमिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामय बनाया।

    स्वस्तिवाचनम् के न्यासी एवं अध्यक्ष हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि यह विशेष आवरण डाक टिकट संग्रहण कला (फिलाटेली) की भाषा के माध्यम से भारत के प्राचीन ज्ञान और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रतीकात्मक रूप से एक सूत्र में पिरोता है। विशेष आवरण में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थ चतुष्टय के साथ जीवात्मा के भावपूर्ण प्रतीक का समावेश किया गया है, जो सम्पूर्ण मानवता को एक कालजयी संदेश देता है कि वास्तविक प्रगति व्यक्ति, समाज और अंतःचेतना के समन्वित एवं संतुलित विकास में निहित है।

    इस विशेष आवरण पर प्रेरणादायी टैगलाइन— “Sixteen Years – A Glorious Journey of Values, Knowledge and the Arts” सोलह वर्ष—मूल्यों, ज्ञान और कलाओं की गौरवशाली यात्रा-अंकित है। यह स्मारक विशेष आवरण स्वस्तिवाचनम् की सोलह वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव है। स्वस्तिवाचनम् एक ऐसी संस्था है, जो संस्कृत पत्रकारिता, योग, आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, इंडोलॉजी तथा व्यापक भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित है। जोशी ने कहा कि वर्षों से स्वस्तिवाचनम् भारत की कालजयी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत और समकालीन समाज के मध्य एक सार्थक सेतु स्थापित करने का सतत प्रयास कर रहा है। वर्ष 2026 का विशेष महत्व इसलिए भी है कि यह स्वस्तिवाचनम् के संस्थापक, प्रख्यात संस्कृत विद्वान, दूरदर्शी चिंतक एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती का वर्ष है। आचार्य दिनेश चंद्र जोशी का जन्म 11 अप्रैल 1926 को उत्तराखंड में हुआ था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन संस्कृत, भारतीय दर्शन, पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान तथा भारत की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। हरीश चंद्र जोशी ने कहा कि आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती के अवसर पर जारी यह विशेष आवरण उनके विचारों, मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनके आजीवन समर्पण को एक विनम्र श्रद्धांजलि है। यह अवसर न केवल स्वस्तिवाचनम् की 16 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है।

     

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