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    CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप का आग्रह, अनुच्छेद 142 के तहत मामले बंद करने की मांग

    2 hours ago

    Yugcharan News / 01 September 2026

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज आपराधिक मुकदमों को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन में शामिल विभिन्न लोगों के खिलाफ दर्ज FIR और संबंधित आपराधिक मामलों को बंद करने का आग्रह किया है।

    मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण रूप से होने वाली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यह मामला प्रदर्शन, आपराधिक मामलों और संवैधानिक न्यायिक शक्तियों से जुड़ा होने के कारण कानूनी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष

    केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उन आपराधिक मामलों को समाप्त करने की मांग की गई है, जो जंतर-मंतर पर हुए CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों में भाग लेने वाले अलग-अलग लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए थे।

    रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लेने का आग्रह किया है। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या निर्देश जारी करने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, इस शक्ति का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और किस सीमा तक किया जाएगा, यह संबंधित मामले के तथ्यों और अदालत के सामने रखी गई दलीलों पर निर्भर करता है।

    इस मामले में केंद्र द्वारा सीधे सुप्रीम कोर्ट से FIR समाप्त करने का अनुरोध किया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक मामलों को समाप्त करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ता है।

    जंतर-मंतर पर हुआ था छात्र प्रदर्शन

    यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन से संबंधित है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन का नेतृत्व Cockroach Janta Party यानी CJP से जुड़े लोगों द्वारा किया गया था। प्रदर्शन के बाद कुछ प्रतिभागियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।

    इन मामलों में जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, उनकी संख्या और प्रत्येक मामले में लगाए गए आरोपों का पूरा विवरण उपलब्ध सामग्री में नहीं दिया गया है। ऐसे में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत भूमिका या किसी विशेष आरोप के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    केंद्र सरकार अब इन मामलों को समाप्त करने के लिए शीर्ष अदालत के विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किए जाने की मांग कर रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल इन मामलों को आगे चलाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें समाप्त करने के विकल्प पर विचार कर रही है।

    अनुच्छेद 142 क्यों महत्वपूर्ण है?

    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष शक्ति प्रदान करता है। इसके तहत शीर्ष अदालत किसी लंबित मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकती है।

    यह प्रावधान सामान्य न्यायिक प्रक्रिया से अलग एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था है। हालांकि, इसका इस्तेमाल प्रत्येक मामले में स्वतः नहीं किया जाता। अदालत मामले की परिस्थितियों, पक्षकारों की दलीलों और न्याय के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह तय करती है कि इस शक्ति का प्रयोग आवश्यक है या नहीं।

    इस मामले में केंद्र सरकार का आग्रह इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस अनुरोध पर किस दृष्टिकोण को अपनाता है और क्या वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने को उचित मानता है।

    सुप्रीम कोर्ट में होगी विस्तृत सुनवाई

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह बताया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में FIR और आपराधिक मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया गया है और अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल को किस आधार पर उचित माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, अदालत इस बात की भी समीक्षा कर सकती है कि मामलों को समाप्त करने का अनुरोध कानूनी मानकों और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं।

    इस तरह की सुनवाई में अदालत केवल सरकार के अनुरोध को स्वीकार या अस्वीकार करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मामले से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर भी विचार कर सकती है।

    प्रदर्शन और आपराधिक मामलों के बीच कानूनी संतुलन

    देश में विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी आवश्यक होता है।

    किसी प्रदर्शन में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका समान नहीं होती। इसलिए किसी भी आपराधिक मामले में व्यक्तिगत भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किया जाना महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में केंद्र की ओर से सभी संबंधित FIR को समाप्त करने का अनुरोध व्यापक कानूनी सवाल खड़ा करता है। अदालत को यह देखना होगा कि क्या मामले की परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें सभी संबंधित मामलों को एक साथ समाप्त करना न्यायहित में होगा या प्रत्येक मामले की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।

    सरकार के अनुरोध से जुड़ा व्यापक महत्व

    केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत हस्तक्षेप का अनुरोध इस मामले को सामान्य FIR से जुड़े विवाद से आगे ले जाता है। अब इसमें संवैधानिक न्यायिक शक्ति का प्रश्न भी शामिल हो गया है।

    यदि सुप्रीम कोर्ट केंद्र के अनुरोध को स्वीकार करता है, तो संबंधित मामलों को समाप्त करने का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, यदि अदालत इस अनुरोध को स्वीकार नहीं करती या अलग-अलग मामलों की स्वतंत्र समीक्षा की आवश्यकता मानती है, तो आपराधिक मामलों की प्रक्रिया अपने निर्धारित कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगा।

    न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर

    मामले की अगली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 की अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति के इस्तेमाल पर विचार करना है। अदालत के सामने यह प्रश्न रहेगा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों को समाप्त करने के लिए इस असाधारण संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया जाना चाहिए या नहीं।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को बंद करने की मांग की है और इस उद्देश्य के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत विशेष हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

    मामले में अदालत का विस्तृत आदेश आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित FIR और आपराधिक मामलों का भविष्य क्या होगा। तब तक इस मामले में किसी भी पक्ष की अंतिम कानूनी स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    कानूनी विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल को लेकर क्या रुख अपनाता है और प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामलों को समाप्त करने के लिए किन संवैधानिक तथा कानूनी मानकों को आधार बनाया जाता है। अदालत की सुनवाई इस मामले में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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