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    दिल्ली के प्लेस्कूल में तीन वर्षीय बच्चे से कथित मारपीट और यौन उत्पीड़न के बाद स्कूल सील करने के आदेश

    2 hours ago

    Yugcharan News / 01 September 2026

    नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक प्लेस्कूल में तीन वर्षीय बच्चे के साथ कथित शारीरिक और यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। मामले में एक अटेंडेंट की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर स्कूल परिसर को सील करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। स्कूल से जुड़े एक शिक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है।

    पुलिस के अनुसार, मामले में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में स्कूल के मालिक और प्रिंसिपल समेत चार लोगों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज किए गए हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी बाकी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई

    अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने प्लेस्कूल के परिसर को सील करने की कार्रवाई शुरू की। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि पुलिस जांच जारी है और मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बच्चे के परिवार को आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है।

    इस कार्रवाई के बाद स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि स्कूल में बच्चों की निगरानी की व्यवस्था कैसी थी और कथित घटनाओं को रोकने या समय रहते सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

    बच्चे के शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद सामने आया मामला

    पुलिस के अनुसार, मामले की जानकारी परिवार को 16 अगस्त के आसपास हुई, जब बच्चे के माता-पिता ने उसके चेहरे और हाथों पर चोट के निशान देखे।

    बच्चे के पिता के अनुसार, 18 अगस्त को स्कूल से घर लौटने के बाद बच्चे की तबीयत खराब हो गई और उसे उल्टी होने लगी। इसके बाद परिवार उसे कान, नाक और गले से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर के पास लेकर गया। पिता का दावा है कि डॉक्टर ने बच्चे की आंखों के आसपास सूजन देखी और जांच के दौरान उसके कान के पर्दों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई।

    बच्चे की हालत और शरीर पर दिखाई दे रहे निशानों को लेकर परिवार ने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा। पिता के मुताबिक, शुरुआत में स्कूल प्रशासन ने परिवार की बातों को स्वीकार नहीं किया, लेकिन बाद में कथित तौर पर स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने पर सहमति जताई।

    सीसीटीवी फुटेज में बच्चे को कुर्सी से बांधने का आरोप

    परिवार ने कथित तौर पर 26 अगस्त को स्कूल की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग देखी। बच्चे के पिता के अनुसार, फुटेज में 18 अगस्त को सुबह करीब 9:45 बजे बच्चे को कई घंटों तक कुर्सी से बांधे जाने की घटना दिखाई दी।

    पिता ने आरोप लगाया कि बच्चा किसी तरह खुद को छुड़ाने में सफल हुआ, जिसके बाद एक अटेंडेंट ने उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की। परिवार ने यह भी दावा किया कि 17 अगस्त को एक शिक्षक ने बच्चे को थप्पड़ मारा था।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के कुछ हिस्सों में बच्चे को एक कक्षा के अंदर कुर्सी से बांधे जाने की स्थिति दिखाई देती है। कथित तौर पर उस समय कक्षा में अन्य बच्चे भी मौजूद थे। फुटेज के कुछ अन्य हिस्सों में बच्चे को दीवार के पास ले जाए जाने की बात भी सामने आई है।

    जांच अधिकारी अब इन फुटेज को अन्य सबूतों के साथ जोड़कर घटनाओं का क्रम समझने की कोशिश कर रहे हैं। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मेडिकल दस्तावेज, परिवार के बयान और स्कूल से जुड़े लोगों से पूछताछ जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।

    मेडिकल दस्तावेज के बाद दर्ज हुई एफआईआर

    परिवार ने कथित तौर पर 27 अगस्त को बच्चे का मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट यानी चिकित्सकीय-कानूनी प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इसके बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे को चोटें कैसे लगीं, स्कूल परिसर में वास्तव में क्या हुआ और इसमें कौन-कौन लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं।

    जांच के दौरान स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि क्या स्कूल प्रबंधन को कथित घटनाओं की जानकारी थी और यदि थी, तो क्या समय रहते कोई कार्रवाई की गई थी।

    पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के तहत मामला

    बच्चे की उम्र तीन वर्ष होने के कारण मामला विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

    पॉक्सो कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। ऐसे मामलों में जांच के दौरान बच्चे की पहचान और निजता की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है।

    पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अटेंडेंट से पूछताछ की जा रही है। वहीं शिक्षक को निलंबित किया गया है। एफआईआर में नामजद अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    यह ध्यान रखना जरूरी है कि एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम आरोपी के रूप में दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है।

    सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि पुलिस जांच जारी है और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मामले में जिम्मेदारी तय हो। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    स्कूल परिसर को सील करने की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है, जबकि आरोपों से संबंधित आपराधिक जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य अलग है और अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बच्चे के परिवार को यह भरोसा भी दिलाया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    इस घटना ने छोटे बच्चों की देखभाल करने वाले स्कूलों और प्लेस्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कम उम्र के बच्चे अपनी सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं को स्पष्ट रूप से बताने की स्थिति में हमेशा नहीं होते। ऐसे में स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की नियमित निगरानी, कर्मचारियों का उचित सत्यापन, सीसीटीवी व्यवस्था और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं किसी भी स्कूल या प्लेस्कूल में महत्वपूर्ण होती हैं।

    हालांकि, इस विशेष मामले में सुरक्षा व्यवस्था में क्या कमी थी और किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसका निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।

    पुलिस जांच जारी

    फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, परिवार के बयानों और अन्य संभावित सबूतों की जांच कर रही है। मामले में आगे और लोगों से पूछताछ या अन्य कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जा सकती है।

    बच्चे की पहचान और उसकी निजता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करना भी कानून और पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप सीमित रखा जाना जरूरी है।

     

    दिल्ली सरकार ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्लेस्कूल परिसर में बच्चे के साथ क्या हुआ और इस मामले में किन लोगों की वास्तविक भूमिका थी।

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