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    विशेष साक्षात्कार: हिंदी—संस्कृति, ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु

    1 hour ago

    हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में प्रो.जनक सिंह मीना,  गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय 

    प्र. आपके लिए हिंदी भाषा का क्या महत्व है?

    1. मेरे लिए हिंदी भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना, विचार और ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जनसामान्य से सहज रूप से जुड़ती है और विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच संवाद स्थापित करती है। एक शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में मैं हिंदी को ज्ञान के लोकतंत्रीकरण का महत्वपूर्ण साधन मानता हूँ। मेरे लिए हिंदी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह भारतीय भाषाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच सेतु का कार्य करती है। भाषाई विविधता भारत की शक्ति है। अतः हिंदी मेरे लिए केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समावेशन और ज्ञान-विस्तार का माध्यम है।

    प्र. हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता आप क्यों महसूस करते हैं?

    2. मेरे विचार से हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता केवल हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी भाषाई अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। हिंदी भारत के करोड़ों लोगों को जोड़ने वाली एक सशक्त संपर्क भाषा है। यह हमारे साहित्य, लोकजीवन, सामाजिक अनुभवों और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्ति प्रदान करती है। आज वैश्वीकरण और डिजिटल युग में अंग्रेजी सहित अनेक विदेशी भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में हिंदी दिवस हमें अपनी मातृभाषाओं और भारतीय भाषाओं के महत्व को समझने तथा हिंदी को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और प्रशासन की भाषा के रूप में अधिक सक्षम बनाने की प्रेरणा देता है।

    प्र. आज के समय में हिंदी भाषा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?

    3. मेरे विचार से आज हिंदी के सामने चुनौती उसके अस्तित्व की नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और बदलती तकनीकी दुनिया में उसकी प्रभावी उपस्थिति की है।मेरे अनुसार हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेज़ी से प्रतिस्पर्धा करना नहीं, बल्कि स्वयं को समयानुकूल बनाना है। हमें ऐसी हिंदी चाहिए जो सरल भी हो, वैज्ञानिक भी हो, तकनीक-सक्षम भी हो और वैश्विक संवाद में प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सके।

    प्र. क्या आपको लगता है कि युवा पीढ़ी हिंदी से दूर होती जा रही है? क्यों?

    4. हाँ, मुझे लगता है कि युवा पीढ़ी का एक वर्ग हिंदी से कुछ हद तक दूर होता जा रहा है, लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि पूरी युवा पीढ़ी हिंदी से विमुख हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण अंग्रेज़ी का बढ़ता प्रभाव, रोजगार और उच्च शिक्षा में अंग्रेज़ी की उपयोगिता, डिजिटल माध्यमों में हिंग्लिश का बढ़ता चलन और हिंदी को लेकर बनी सामाजिक धारणाएँ हैं।

    प्र. सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया है या उसके स्वरूप को प्रभावित किया है?

    5. भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच Hinglish के प्रयोग में निरंतर वृद्धि पाई गई। इसके साथ हिंदी की लिपि और अभिव्यक्ति शैली में भी परिवर्तन आया है। अनेक युवा देवनागरी के बजाय रोमन लिपि में हिंदी लिखते हैं—जैसे “Aap kaise hain?”। इससे संवाद तेज और सहज होता है, लेकिन वर्तनी की एकरूपता तथा हिंदी की पारंपरिक भाषिक संरचना के सामने चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं।

    प्र. हिंदी और अंग्रेजी के बीच संतुलन को आप किस तरह देखते हैं?

    6. हिंदी और अंग्रेजी के बीच संतुलन को मैं प्रतिस्पर्धा के बजाय सह-अस्तित्व और सहयोग के रूप में देखता हूँ। अंग्रेजी आज वैश्विक संचार, विज्ञान, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि हिंदी हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना, अभिव्यक्ति और जनसंचार की सशक्त भाषा है। मेरे विचार से अंग्रेजी सीखना या उसका प्रयोग करना हिंदी के प्रति दूरी का संकेत नहीं होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि हम अंग्रेजी को ज्ञान और वैश्विक अवसरों की भाषा के रूप में अपनाएँ तथा हिंदी को अपनी जड़ों, विचारों और व्यापक जनसमुदाय से जुड़ने की भाषा के रूप में सशक्त बनाएँ। आज आवश्यकता “हिंदी बनाम अंग्रेजी” की नहीं, बल्कि “हिंदी और अंग्रेजी” के संतुलित प्रयोग की है। बहुभाषिकता हमारी शक्ति है। यदि युवा दोनों भाषाओं में दक्ष हों, तो वे स्थानीय संवेदना और वैश्विक दृष्टि—दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ सकते हैं।

    प्र. उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हिंदी की स्थिति कैसी है?

    7. मेरे विचार से उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हिंदी की स्थिति संभावनाओं से भरी हुई है, लेकिन अभी इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है। लंबे समय तक उच्च शिक्षा और विशेषकर शोध के क्षेत्र में अंग्रेजी का वर्चस्व रहा है, जिसके कारण हिंदी में उच्च स्तरीय अकादमिक सामग्री और शोध प्रकाशन अपेक्षाकृत सीमित रहे। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, ज्ञान के स्थानीयकरण और बहुभाषी शिक्षा को अधिक महत्व मिला है। यूजीसी भी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम, अनुवाद और शिक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल कर रहा है।

    प्र. विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षकों को क्या प्रयास करने चाहिए?

    8. विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षकों को हिंदी को केवल परीक्षा का विषय न बनाकर अभिव्यक्ति, संवाद और रचनात्मकता की भाषा के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रयास किए जा सकते हैं: कक्षा को संवादात्मक बनाना ,तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग,साहित्य को रोचक बनाना , रचनात्मक गतिविधियाँ , दैनिक जीवन से जोड़ना, विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति का सम्मान, हिंदी और अन्य भाषाओं के बीच संतुलन । मेरे विचार से शिक्षक स्वयं हिंदी के प्रभावी और सहज प्रयोग का उदाहरण बनें, तभी विद्यार्थी भाषा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण महसूस करेंगे। हिंदी को बोझ नहीं, संवाद, संस्कृति, ज्ञान और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी जीवंत भाषा के रूप में प्रस्तुत करना सबसे प्रभावी उपाय होगा।

    प्र. क्या हिंदी रोजगार के लिए भी एक प्रभावी भाषा बन सकती है?

    9. हाँ, हिंदी रोजगार के लिए एक प्रभावी और व्यापक भाषा बन सकती है। आज हिंदी केवल साहित्य और संवाद की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि प्रशासन, शिक्षा, मीडिया, पत्रकारिता, अनुवाद, पर्यटन, बैंकिंग, डिजिटल कंटेंट, विज्ञापन और तकनीकी क्षेत्र में भी इसके अवसर बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से डिजिटल अर्थव्यवस्था और सोशल मीडिया के विस्तार ने हिंदी में कंटेंट राइटिंग, पत्रकारिता, अनुवाद, कॉपीराइटिंग, वॉयस-ओवर और ऑनलाइन शिक्षा जैसे नए रोजगार के क्षेत्र खोले हैं। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग से भी रोजगार की संभावनाएँ बनी हुई हैं।

    प्र. नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और हिंदी की भूमिका को आप किस रूप में देखते हैं?

    10. नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं और हिंदी की भूमिका को मैं शिक्षा, ज्ञान, संस्कृति और आत्मविश्वास—इन चारों के समन्वय के रूप में देखता हूँ। NEP 2020 ने पहली बार भाषा को केवल संचार का माध्यम न मानकर ज्ञान-अर्जन और व्यक्तित्व-विकास का महत्वपूर्ण आधार माना है। नीति में जहाँ तक संभव हो, कम-से-कम कक्षा 5 तक और preferably कक्षा 8 तथा आगे भी मातृभाषा/स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा देने की बात कही गई है। मेरे विचार से हिंदी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंदी ज्ञान के लोकतंत्रीकरण और उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुँच का माध्यम बन सकती है। यदि विज्ञान, तकनीक, कानून, प्रशासन, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान की गुणवत्तापूर्ण सामग्री हिंदी में उपलब्ध हो, तो विद्यार्थी अपनी भाषा में विषय को अधिक सहजता से समझ सकेंगे। NEP उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं के माध्यम से तथा द्विभाषी रूप में कार्यक्रम संचालित करने को भी प्रोत्साहित करती है। 

    प्र. तकनीक और AI के बढ़ते दौर में हिंदी के लिए क्या संभावनाएँ हैं?

    11. तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दौर में हिंदी के लिए संभावनाएँ अत्यंत व्यापक हैं। मेरे विचार से AI हिंदी के सामने चुनौती नहीं, बल्कि उसे ज्ञान, रोजगार, शिक्षा और वैश्विक संचार की भाषा बनाने का एक बड़ा अवसर है।सबसे पहली संभावना हिंदी में AI आधारित सेवाओं की है। दूसरी बड़ी संभावना शिक्षा और उच्च शिक्षा में है। तीसरी संभावना रोजगार और नए व्यवसायों की है। चौथी संभावना समावेशी डिजिटल शासन की है। हालाँकि, इसके साथ हमें भाषाई शुद्धता, सांस्कृतिक संदर्भ, डेटा की गुणवत्ता और AI द्वारा उत्पन्न गलत सूचनाओं जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। हिंदी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल कॉर्पस, शब्दकोश, पारिभाषिक शब्दावली और प्रमाणित साहित्यिक सामग्री का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण आवश्यक है। 

    प्र. हिंदी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

    12. मेरे दृष्टिकोण से कहा जाए तो हिंदी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए उसे केवल साहित्य और संस्कृति की भाषा न रखकर ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा बनाना होगा। आज डिजिटल युग में भाषा की वैश्विक शक्ति उसके डिजिटल विस्तार से भी निर्धारित होती है। UNESCO भी बहुभाषी डिजिटल व्यवस्था, मशीन अनुवाद, वाक्-पहचान और भाषा-प्रौद्योगिकी को भाषाओं के विस्तार के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखता है।

    प्र. विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने और साहित्य से जुड़ने के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

    13. विद्यार्थियों के लिए मेरा संदेश है कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में न पढ़ें, बल्कि उसे अपने विचार, संवेदना और अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में अपनाएँ। हिंदी साहित्य हमारे समाज, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का दर्पण है। प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, निराला और कबीर जैसे साहित्यकारों को पढ़ने से न केवल भाषा समृद्ध होती है, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि भी विकसित होती है।

    प्र. अंत में, हिंदी दिवस के अवसर पर आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?

    14. हिंदी दिवस के अवसर पर मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि हिंदी केवल हमारी भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना, विचार और पहचान की अभिव्यक्ति है। आज का युवा वैश्विक दुनिया से जुड़ रहा है, इसलिए अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युवाओं को हिंदी को केवल परीक्षा या औपचारिकता की भाषा न मानकर ज्ञान, शोध, तकनीक, रोजगार और नवाचार की भाषा के रूप में अपनाना चाहिए। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी के नए अवसर सामने आ रहे हैं। हमें इन अवसरों का रचनात्मक उपयोग करना चाहिए।

    मेरा युवाओं से आग्रह है—दूसरी भाषाएँ सीखिए, लेकिन अपनी भाषा को मत भूलिए; वैश्विक बनिए, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहिए। हिंदी का सम्मान करना भारत की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना है। हिंदी का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब युवा इसे बोलने के साथ-साथ इसमें सोचेंगे, लिखेंगे, शोध करेंगे और नए ज्ञान का सृजन करेंगे।

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