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    सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज ने ‘अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस’ पर जागरूकता सत्र का हुआ आयोजन

    1 hour ago

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज द्वारा 5 सितंबर को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, लाल कोठी, जयपुर में ‘अनलर्निंग जेंडरः स्टीरियोटाइप्स एंड सोशल एक्सपेक्टेशंस’ विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के दौरान सेंटर संयोजक डॉ. स्वीटी माथुर ने ‘सेक्स’ और ‘जेंडर’ के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि सेक्स जैविक आधार पर निर्धारित होता है, जबकि जेंडर समाज द्वारा निर्मित एवं परिभाषित भूमिकाओं और अपेक्षाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि   प्रकृति ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है, लेकिन समाज ने समय के साथ स्त्री और पुरुष के लिए अलग-अलग भूमिकाएं और अपेक्षाएं निर्धारित कर दीं। उन्होंने इस विषय को अधिक प्रभावी एवं रोचक ढंग से समझाने के लिए दो वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों को जेंडर आधारित रूढ़ियों, सामाजिक अपेक्षाओं एवं निर्धारित भूमिकाओं के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना तभी संभव है जब महिलाएं सशक्त हों और इसके लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र को संवादात्मक बनाते हुए विद्यार्थियों को अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हुए बताया कि उनके घरों में सामान्यतः पैसा कमाने की जिम्मेदारी पिता की होती है, जबकि रोजमर्रा के घरेलू कार्य मुख्य रूप से मां करती हैं। इस चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार पारंपरिक सामाजिक अपेक्षाएं परिवार और दैनिक जीवन में जेंडर भूमिकाओं को प्रभावित करती हैं। सेंटर सदस्य डॉ. पूर्वा भारद्वाज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज द्वारा निर्मित इन जंजीरों और रूढ़ियों को तोड़ पाना आसान नहीं है। इसके लिए बदलाव की शुरुआत हमें स्वयं से और अपने घर से करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने घरों में ही कार्यों और जिम्मेदारियों को जेंडर के आधार पर बांटने के बजाय समान रूप से साझा करने की शुरुआत करें, तो व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता सत्र विद्यार्थियों को सामाजिक रूढ़ियों पर विचार करने तथा अधिक समानतापूर्ण और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। सत्र में लगभग 60 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सेंटर की सदस्य डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. दमयंती सोढ़ा एवं डॉ. सुरभि माथुर की सक्रिय भागीदारी रही एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य रामसेवक, शिक्षिका अनिता दाधीच एवं नरेश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे।

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