Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    पारंपरिक वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता मानसिक स्वास्थ्य, हृदय रोग एवं मनोदैहिक विकारों पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन

    1 hour ago

    जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पारंपरिक भारतीय वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता पत्र (एमओयू) संपन्न हुआ। यह समझौता 2 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा की गरिमामयी अध्यक्षता में किया गया।

    इस पहल का उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद, हृदय रोगों तथा विभिन्न मनोदैहिक विकारों के संदर्भ में भारतीय पारंपरिक ज्ञान-पद्धतियों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वित अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. नारायण होसमने द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर वैदिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तावित सहयोग के अंतर्गत मंत्र चिकित्सा, गो-आधारित चिकित्सा तथा काऊ कडलिंग जैसी पारंपरिक एवं वैकल्पिक पद्धतियों का आधुनिक चिकित्सीय विज्ञान और वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक परामर्श के साथ अध्ययन एवं मूल्यांकन किया जाएगा।

    इस त्रिपक्षीय सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में प्रारंभिक चिकित्सा, डायग्नोस्टिक्स एवं परामर्श संबंधी जांच-सुविधाओं के लिए एक स्क्रीनिंग केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही मंत्रों की ध्वनि तरंगों एवं गो-आलिंगन जैसी गतिविधियों के मानव मस्तिष्क, हृदय गति परिवर्तनशीलता (हार्ट रेट वैरिएबिलिटी), रक्तचाप तथा मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों का क्लिनिकल एवं वैज्ञानिक अध्ययन करने की योजना है।

    यह संपूर्ण कल्याणकारी परियोजना परम पूज्य सिद्ध गुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव के आशीर्वाद एवं उनके वैश्विक शांति अभियान (ग्लोबल पीस मिशन) की प्रेरणा से मानव कल्याण के व्यापक उद्देश्य को समर्पित बताई गई।

    कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से देखने की समृद्ध दृष्टि रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के मध्य संवाद एवं प्रमाण-आधारित अनुसंधान समय की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी, संजय शर्मा, डॉ. सुनील कुमार गर्सा, महावीर खर्रा एवं आत्रेय कुमार सहित विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. राजधर मिश्र, डॉ. शम्भु कुमार झा, डॉ. दिवाकर मिश्र, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. मधुबाला शर्मा, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, सुरेन्द्र मोहन एवं राजेश कुमार शर्मा उपस्थित थे।

    उपस्थित विद्वानों ने इस सहयोगात्मक पहल को भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच सेतु निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया तथा मानव कल्याण के लिए इसके संभावित योगदान पर विचार व्यक्त किए।

    कार्यक्रम का संचालन मंत्र प्रतिष्ठान निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह पालावत ने किया।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    फ्रेशर्स 2026-युवा ऊर्जा का संगम, छात्राओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुत किया डांस सहित अन्य कार्यक्रम
    Next Article
    “आरम्भ-2026: नई शुरुआत, नए सपने और सफलता की नई उड़ान” — रीजनल कॉलेज में इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों का भव्य स्वागत

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment