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    शीर्षक: पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत में एलपीजी संकट की आशंका, कई राज्यों में लंबी कतारें; सरकार ने हालात नियंत्रित होने का किया दावा

    1 month ago

    Yugcharan News / 12 March 2026

    पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के बीच भारत में एलपीजी (रसोई गैस) की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। देश के कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, वहीं कुछ स्थानों पर होटल और छोटे व्यवसाय गैस की कमी से प्रभावित होने लगे हैं। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    सूत्रों और सरकारी बयानों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। खासकर हॉरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ऊर्जा परिवहन पर अनिश्चितता ने भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है।

    सरकार का दावा: हालात पर नजर

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, भारत के लिए अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं और विभिन्न देशों के साथ बातचीत भी जारी है।

    उन्होंने बताया कि कुछ संवेदनशील कूटनीतिक मामलों के कारण सभी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। हालांकि उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है और आपूर्ति को स्थिर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पतालों और श्मशान घाटों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो।

    कई राज्यों में लंबी कतारें

    इस बीच, देश के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों और एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कई शहरों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां लोग घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

    कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम पर भारी ट्रैफिक के कारण कई बार सर्वर काम करना बंद कर रहा है, जिसके कारण लोग सीधे एजेंसी कार्यालय पहुंचकर गैस बुक कराने को मजबूर हैं।

    एलपीजी वितरकों के संगठनों से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि हाल के दिनों में सिलेंडर बुकिंग की संख्या अचानक बढ़ गई है। उनके अनुसार, यह काफी हद तक घबराहट में की जा रही बुकिंग का परिणाम भी हो सकता है।

    घबराहट में खरीदारी से बढ़ी मांग

    कई विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक कमी से ज्यादा समस्या “पैनिक बाइंग” यानी घबराहट में खरीदारी के कारण पैदा हो रही है। जब लोगों को भविष्य में कमी की आशंका होती है तो वे पहले से अधिक मात्रा में गैस सिलेंडर बुक करने लगते हैं।

    ऐसे हालात में आपूर्ति प्रणाली पर अचानक दबाव बढ़ जाता है, जिससे वितरण में अस्थायी व्यवधान पैदा हो सकता है।

    सरकारी अधिकारियों ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से अतिरिक्त गैस सिलेंडर बुक न करें और अफवाहों पर विश्वास न करें।

    उद्योग और होटल व्यवसाय प्रभावित

    एलपीजी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर कई छोटे व्यवसायों और होटल उद्योग पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ राज्यों में होटल और रेस्तरां संचालकों ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ा है।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ छोटे होटल और ढाबे फिलहाल सीमित भोजन ही परोस रहे हैं। वहीं कुछ प्रतिष्ठानों ने अस्थायी रूप से बंद रहने का निर्णय भी लिया है।

    उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि कई छोटे उद्योग, विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की इकाइयां भी एलपीजी पर निर्भर हैं। यदि आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

    वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी तेजी के साथ बढ़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में आपूर्ति से जुड़ी घटनाओं और जहाजों पर हमलों की खबरों ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर और दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर ज्यादा पड़ सकता है।

    भारत की आयात पर निर्भरता

    ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अनुमान है कि भारत की कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85–90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है।

    एलपीजी के मामले में भी आयात पर काफी निर्भरता है, विशेष रूप से घरेलू गैस कनेक्शनों की संख्या बढ़ने के बाद मांग में तेजी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आता है तो इसका असर देश के अंदर महसूस किया जा सकता है।

    संसद में भी उठा मुद्दा

    एलपीजी आपूर्ति को लेकर संसद परिसर में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की और इसे आम जनता से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

    हालांकि सरकार की ओर से कहा गया कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    अफवाहों पर सख्ती

    कुछ राज्यों की पुलिस और प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के खिलाफ भी चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि गैस या ईंधन की कमी से संबंधित गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अपुष्ट खबरों को साझा न करें।

    ऊर्जा सुरक्षा पर नई बहस

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत देश को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने और रणनीतिक भंडार बढ़ाने पर अधिक ध्यान देना होगा।

    सरकार पहले से ही बायोफ्यूल, एथेनॉल मिश्रण और इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि इन विकल्पों का व्यापक स्तर पर उपयोग अभी भी सीमित है।

    आगे की स्थिति पर नजर

    फिलहाल केंद्र सरकार का कहना है कि एलपीजी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अतिरिक्त आयात, वितरण व्यवस्था में सुधार और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने जैसे उपायों पर काम किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थिति में स्थिरता आती है तो ऊर्जा बाजार भी धीरे-धीरे सामान्य हो सकते हैं। तब तक सरकार और तेल कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि देश के करोड़ों उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति बिना बाधा जारी रखी जाए।

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