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    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: युवाओं के नाम खुला पत्र जारी, NEET-UG विवाद की नैतिक जिम्मेदारी ली

    56 minutes ago

    नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए देश के युवाओं के नाम एक खुला पत्र जारी किया। उन्होंने कहा कि NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। पत्र में उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं तथा देश के युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

     

    प्रधान ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएँ सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द कर पुनः आयोजित कराई तथा 2027 से NEET-UG को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए "Whole of Government Approach" के तहत केंद्र, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के समन्वय से पुनर्परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई।

     

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें गरीब परिवारों से आने वाले अनेक मेधावी छात्रों ने सफलता प्राप्त की। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया, जिससे वे अत्यंत व्यथित हुए।

     

    उन्होंने कहा कि "भारत की युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें भ्रम तथा दुष्प्रचार के जाल में फँसने नहीं देना चाहिए।" जंतर-मंतर सहित देशभर में बने हालात का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठा सकें, किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे और छात्र अपनी पढ़ाई तथा करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा।

     

    अपने पत्र में प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, विश्वास और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी देश, ओडिशा की जनता तथा भारत के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित होकर कार्य करते रहेंगे।

     "यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन हमारी अभी भी दो और माँगें हैं। हम ऐसे ही वापस नहीं जाएंगे।"

     

    धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। उन सभी परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।

     

    दूसरी माँग, 20 जुलाई को जिन पुलिस अधिकारियों ने गुंडों की तरह कार्रवाई की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उस दिन छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।

     

    याद रखिए, कॉकरोच से पंगा मत लेना।

     

    — अभिजीत दीपके, संस्थापक, CJP

     

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