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    प्रह्लाद जोशी के पुराने NEET बयान की फिर चर्चा, शिक्षा मंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    1 hour ago

    Yugcharan News / 27 July 2026

    केंद्र सरकार में नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति के बाद वर्ष 2022 में दिया गया उनका एक पुराना बयान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और राजनीतिक नेताओं ने उस बयान का उल्लेख करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यह बयान उस समय का है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हजारों भारतीय मेडिकल छात्र यूक्रेन में फंसे हुए थे और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए केंद्र सरकार अभियान चला रही थी।

    नए शिक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के पुराने बयान के वीडियो और समाचार क्लिप दोबारा साझा किए जाने लगे। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक बहस देखने को मिली। कुछ लोगों ने बयान की आलोचना की, जबकि अन्य ने इसे उस समय के संदर्भ में देखने की बात कही।

    2022 में क्या कहा था प्रह्लाद जोशी ने?

    वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए यूक्रेन में मौजूद थे। उस समय मीडिया से बातचीत के दौरान प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि विदेश में मेडिकल पढ़ने जाने वाले लगभग 90 प्रतिशत छात्र भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) उत्तीर्ण नहीं कर पाते।

    उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि इस विषय पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं होगा और उस समय प्राथमिकता युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी होनी चाहिए। उनके अनुसार उस समय छात्रों के विदेश जाने के कारणों पर बहस करने का समय नहीं था।

    हालांकि, उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आई थीं और कई लोगों ने इसे छात्रों के प्रति असंवेदनशील बताया था।

    शिक्षा मंत्री बनने के बाद फिर वायरल हुआ बयान

    हाल ही में प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका पुराना बयान फिर से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाने लगा। कई यूजर्स ने वीडियो क्लिप और पुराने समाचारों के स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए इस पर अपनी राय व्यक्त की।

    कुछ विपक्षी नेताओं ने भी इस बयान का उल्लेख करते हुए सरकार पर निशाना साधा। वहीं कई समर्थकों का कहना है कि उस समय दिए गए बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और केवल एक हिस्से को साझा कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

    धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिला नया दायित्व

    प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद ऐसे समय संभाला है जब देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।

    पूर्व शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर गर्व है और वे देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।

    प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक अनुभव

    प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री, खान मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व मिलने के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मेडिकल शिक्षा को लेकर पुरानी बहस फिर तेज

    जोशी के पुराने बयान के फिर से चर्चा में आने के साथ ही मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर बहस भी तेज हो गई है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेशों में मेडिकल शिक्षा के लिए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में सीमित सरकारी मेडिकल सीटें, निजी कॉलेजों की ऊंची फीस और प्रतिस्पर्धा के कारण कई छात्र विदेश का रुख करते हैं।

    दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय के सामने आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण चुनौतियां रहेंगी।

    सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

    प्रह्लाद जोशी के पुराने बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे छात्रों की मेहनत का अपमान बताया, जबकि कई अन्य यूजर्स ने कहा कि बयान को पूरे संदर्भ के साथ समझना चाहिए।

    राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस विषय पर अपनी-अपनी राय रखी है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की शिक्षा नीति से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि नए शिक्षा मंत्री शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए गंभीरता से कार्य करेंगे।

    आगे की चुनौतियां

    शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, मेडिकल शिक्षा में सुधार और छात्रों का विश्वास बहाल करने जैसी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता होगी। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं।

    फिलहाल, वर्ष 2022 का उनका पुराना बयान एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि शिक्षा मंत्रालय की ओर से भविष्य में परीक्षा प्रणाली और उच्च शिक्षा से जुड़े सुधारों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

     
     
     
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