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    ई-20 ईंधन विवाद: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत, Meta-Google समेत कई प्लेटफॉर्म के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति

    1 hour ago

    Yugcharan News / 27 July 2026

    ई-20 ईंधन नीति को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें Meta, Google, X (पूर्व में Twitter), YouTube तथा अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ दीवानी मानहानि (Civil Defamation) का मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

    बताया जा रहा है कि मंत्री की ओर से अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो, पोस्ट, रील और अन्य डिजिटल सामग्री प्रसारित की गई, जिनमें उनकी छवि को कथित रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। याचिका के अनुसार इन सामग्रियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डीपफेक तकनीक का उपयोग कर मंत्री की आवाज, चेहरा और व्यक्तित्व का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ।

    अदालत ने दी मुकदमा दायर करने की अनुमति

    मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अभय आहूजा की अदालत में हुई। नितिन गडकरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप एस. लड्डा ने अदालत में पक्ष रखा।

    उन्होंने अदालत को बताया कि विवादित सामग्री मुंबई सहित देशभर में इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध है। चूंकि यह कंटेंट बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में भी देखा जा सकता है, इसलिए इस मामले में अदालत के समक्ष दीवानी वाद दायर करने की अनुमति आवश्यक थी।

    दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने मंत्री को मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी। विस्तृत आदेश आने की प्रतीक्षा है।

    क्या है पूरा विवाद?

    याचिका के अनुसार कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट और डीपफेक वीडियो प्रसारित किए गए जिनमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि ई-20 पेट्रोल कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत रूप से नितिन गडकरी जिम्मेदार हैं।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ पोस्टों में मंत्री और उनके परिवार पर इस नीति से आर्थिक लाभ उठाने जैसे आरोप लगाए गए, जिन्हें पूरी तरह निराधार, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक बताया गया है।

    मंत्री का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री आम लोगों के बीच उनकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित करने तथा यह संदेश देने का प्रयास करती है कि उन्होंने अपने सार्वजनिक पद का निजी लाभ के लिए उपयोग किया है।

    डीपफेक तकनीक पर भी जताई चिंता

    याचिका में विशेष रूप से डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि AI आधारित तकनीक के माध्यम से मंत्री की आवाज, चेहरा, हाव-भाव और व्यक्तित्व की नकली डिजिटल सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार डीपफेक तकनीक का उपयोग हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण फर्जी वीडियो और ऑडियो बनाकर किसी भी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।

    किन पक्षों को बनाया गया प्रतिवादी?

    प्रस्तावित मुकदमे में Meta (Facebook और Instagram), Google LLC, YouTube, X Corp के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इसके अतिरिक्त उन अज्ञात व्यक्तियों को भी "John Doe" या "Ashok Kumar" प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया है, जिनकी पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है लेकिन जिन पर कथित रूप से विवादित सामग्री तैयार करने या प्रसारित करने का आरोप है।

    11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग

    मंत्री की ओर से दायर प्रस्तावित मुकदमे में लगभग 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की गई है।

    याचिका के अनुसार वायरल सामग्री के कारण उनकी प्रतिष्ठा, सार्वजनिक छवि, व्यक्तिगत सम्मान और व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर क्षति पहुंची है। इसलिए संबंधित पक्षों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction), आपत्तिजनक सामग्री हटाने तथा क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।

    अदालत में क्या कहा गया?

    याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह मुकदमा किसी भी प्रकार की लोकतांत्रिक आलोचना या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकने के उद्देश्य से नहीं लाया जा रहा है।

    दस्तावेजों के अनुसार मंत्री की ओर से कहा गया है कि तथ्य आधारित, सद्भावना में की गई और सार्वजनिक हित से जुड़ी आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, झूठे आरोप, डीपफेक सामग्री और मानहानिकारक दुष्प्रचार को वैध अभिव्यक्ति की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

    ई-20 पेट्रोल क्या है?

    ई-20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का उद्देश्य इस मिश्रण के माध्यम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण में कमी लाना तथा देश में जैव ईंधन (Biofuel) के उपयोग को बढ़ावा देना है।

    हालांकि इस नीति को लेकर समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है। कुछ विशेषज्ञों और वाहन मालिकों ने पुराने वाहनों की ई-20 ईंधन के साथ अनुकूलता को लेकर चिंता व्यक्त की है। वहीं सरकार और कई वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि नई पीढ़ी के वाहन इस ईंधन के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।

    आगे क्या होगा?

    हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब नितिन गडकरी औपचारिक रूप से दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। मामले की सुनवाई आगे बॉम्बे हाईकोर्ट की संबंधित पीठ के समक्ष होगी, जहां सभी पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

    यदि अदालत प्रारंभिक सुनवाई में उचित समझती है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को विवादित सामग्री हटाने, भविष्य में ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकने अथवा अन्य आवश्यक निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत की विस्तृत सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

     

    फिलहाल यह मामला देश में डीपफेक तकनीक, ऑनलाइन मानहानि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों से जुड़ी बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। मामले में आगे आने वाले न्यायिक आदेशों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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