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    बिहार बंद हिंसा: सिवान में AK-47 चलाने वाला पुलिसकर्मी निलंबित, छात्र प्रदर्शन के बाद 200 से अधिक लोगों की हिरासत पर उठे सवाल

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 27-07-2026

    बिहार में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के सिवान जिले में प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से AK-47 से फायरिंग करने वाले एक पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पटना सहित विभिन्न जिलों में छात्र प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

    प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक मामले और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किए गए थे। इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक होने की भी खबरें सामने आईं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई, जबकि प्रदर्शनकारियों और उनके पक्ष में खड़े अधिवक्ताओं ने पुलिस पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग और मनमानी हिरासत के आरोप लगाए हैं।

    सिवान में पुलिसकर्मी निलंबित

    बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सिवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने की घटना सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) के अनुसार, पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई तथा निर्धारित पुलिस प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं।

    इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाया और निष्पक्ष जांच की मांग की।

    200 से अधिक प्रदर्शनकारियों की हिरासत का दावा

    प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध करा रहे कुछ अधिवक्ताओं का दावा है कि 22 और 25 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद लगभग 200 लोगों को विभिन्न थानों में हिरासत में लिया गया था। उनका कहना है कि इनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे तथा कुछ नाबालिग भी थे।

    वकीलों के अनुसार कई हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महिलाओं और कुछ नाबालिगों को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

    कुछ परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके परिजनों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी समय पर नहीं दी गई। वहीं अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्तियों को नियमानुसार निर्धारित समय के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

    हालांकि इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन का पक्ष अलग है।

    पुलिस का क्या कहना है?

    पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 25 जुलाई को गांधी मैदान क्षेत्र में हुई हिंसा के संबंध में गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महिलाओं और नाबालिगों सहित कुछ लोगों को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

    पुलिस के अनुसार हिंसा के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ तथा कानून-व्यवस्था बाधित करने की कोशिश की गई। इसी आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

    प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है।

    कई जिलों में दर्ज हुए मामले

    बिहार पुलिस के अनुसार 25 जुलाई को हुए बिहार बंद के दौरान सिवान, सारण, भागलपुर, सीतामढ़ी और जहानाबाद सहित कई जिलों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं दर्ज की गईं।

    अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।

    पुलिस के अनुसार इस दौरान कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा, एक निजी वाहन में भी तोड़फोड़ की गई तथा कई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान घायल हुए।

    गांधी मैदान हिंसा पर चार एफआईआर

    पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने चार अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक मामला थाना प्रभारी के बयान पर, दूसरा मजिस्ट्रेट की शिकायत पर, तीसरा पुलिस चौकी पर हमले से संबंधित तथा चौथा सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दर्ज किया गया है।

    इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    प्रदर्शनकारियों के आरोप

    प्रदर्शन से जुड़े कुछ छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई निर्दोष छात्रों को केवल प्रदर्शन स्थल के आसपास मौजूद होने के कारण हिरासत में लिया गया। उनका कहना है कि सरकार की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई।

    प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि यदि किसी छात्र ने हिंसा में भाग नहीं लिया है, तो उसके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।

    हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर प्रशासन का जोर

    राज्य प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या पुलिस पर हमला स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    अधिकारियों का कहना है कि जहां भी कानून का उल्लंघन हुआ, वहां नियमानुसार कार्रवाई की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सिवान में पुलिसकर्मी का निलंबन इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

    राजनीतिक और कानूनी बहस जारी

    बिहार बंद और छात्र आंदोलन के बाद उत्पन्न स्थिति अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है। यह मुद्दा संसद से लेकर न्यायालय तक पहुंच चुका है। विपक्ष लगातार छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार परीक्षा सुधार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर अपना पक्ष रख रही है।

    उधर, सुप्रीम कोर्ट में भी छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। अदालत ने हाल ही में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण और वैधानिक प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार हैं तथा यदि कहीं अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

    आगे क्या?

    अब सभी की नजर बिहार पुलिस की विभागीय जांच, दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया और न्यायालयों में चल रही सुनवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में किसी भी पक्ष की ओर से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आगे और कार्रवाई संभव है।

    फिलहाल यह मामला छात्र आंदोलनों, पुलिस की जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक जांच, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

     
     
     
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