Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    दिल्ली गैंगरेप केस: आरोपी पहले भी महिलाओं से बदसलूकी के आरोप में जिम से निकाला गया था

    48 minutes ago

    Yugcharan News / 24-09-2026

    नई दिल्ली: दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच में पुलिस को आरोपियों के पुराने व्यवहार और गतिविधियों से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले के तीन आरोपियों में शामिल हेमंत को करीब एक महीने पहले महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों के बाद एक जिम से बाहर कर दिया गया था। पुलिस अब आरोपियों की पिछली गतिविधियों और आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

    यह घटना इसी सप्ताह दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क में हुई थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता अपने 17 वर्षीय दोस्त के साथ अपने जन्मदिन के अवसर पर कालकाजी मंदिर में पूजा करने के बाद पार्क पहुंची थी। दोनों पार्क के गेट नंबर 7 से अंदर गए थे। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने उनका पीछा किया और बाद में खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें रोक लिया।

    पुलिस जांच में क्या सामने आया

    मामले में गिरफ्तार आरोपियों में 32 वर्षीय आसिफ, 24 वर्षीय हेमंत और उसका भाई 24 वर्षीय महेश शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आसिफ सब्जी का थोक कारोबारी है और पार्क के आसपास के इलाके से परिचित था। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या आरोपियों ने घटना को पहले से योजना बनाकर अंजाम दिया था।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आसिफ अक्सर आस्था कुंज पार्क के आसपास आता-जाता था और वहां के अपेक्षाकृत सुनसान हिस्सों से परिचित था। जांच के दौरान उसके पास से कथित तौर पर एक पिस्तौल, चाकू और कंडोम बरामद किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन बरामदगी और उनसे जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है।

    जांचकर्ताओं के अनुसार, आसिफ के मोबाइल फोन की जांच में कई अश्लील वीडियो भी मिले हैं। वहीं, दूसरे आरोपी हेमंत और महेश के बारे में पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपने फोन से सर्च हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिजिटल गतिविधियों और घटना से जुड़े संभावित साक्ष्यों की पड़ताल की जा सके।

    खुद को पुलिसकर्मी बताकर रोकने का आरोप

    पुलिस जांच के मुताबिक, पीड़िता और उसका दोस्त पार्क में प्रवेश करने के बाद करीब एक किलोमीटर तक आरोपियों की नजर में रहे। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया और खुद को पुलिसकर्मी बताया।

    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता के दोस्त को संबोधित करते समय ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें पुलिसकर्मी होने का भरोसा हो सके। इसके बाद आरोप है कि पीड़िता को उसके दोस्त से अलग कर दिया गया।

    जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, आसिफ ने कथित तौर पर चाकू और पिस्तौल दिखाकर दोनों को धमकाया। इसके बाद तीनों आरोपी पीड़िता को पार्क के अलग-अलग सुनसान हिस्सों में ले गए, जहां उसके साथ कथित रूप से यौन हिंसा की गई।

    पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि घटना के दौरान आरोपियों में से एक पीड़िता पर नजर रखता था, जबकि दूसरे को फोन करके आगे की कार्रवाई के लिए बुलाया जाता था। हालांकि, घटना से जुड़े इन सभी विवरणों की पुष्टि जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया के माध्यम से की जा रही है।

    घटना के बाद कपड़े धोने का आरोप

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, कथित अपराध के बाद आरोपियों ने पीड़िता को शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और वहां से चले गए। इसके बाद पीड़िता और उसका दोस्त पार्क से बाहर निकलने में सफल रहे और पुलिस को सूचना दी।

    जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित घटना के बाद पास में खाना खाया और फिर श्रीनिवासपुरी स्थित अपने घर चले गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वहां उन्होंने अपने कपड़े धोए, जिससे संभावित सबूत नष्ट करने की कोशिश किए जाने का संदेह है।

    जांचकर्ता अब इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं कि कपड़ों और अन्य वस्तुओं को धोने के पीछे क्या उद्देश्य था और क्या इससे किसी महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

    हेमंत को जिम से निकाले जाने की जानकारी

    जांच के दौरान हेमंत के पुराने व्यवहार को लेकर भी जानकारी सामने आई है। PTI ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि करीब एक महीने पहले जिम प्रबंधन को कई महिलाओं की ओर से हेमंत के व्यवहार को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद उसे जिम से हटा दिया गया था।

    हालांकि, जिम से हटाए जाने और मौजूदा आपराधिक मामले के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को पुलिस ने स्थापित नहीं किया है। यह जानकारी जांच के दौरान सामने आए उसके कथित पुराने व्यवहार के संदर्भ में देखी जा रही है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों का आस्था कुंज पार्क में पहले भी इसी तरह की घटनाओं से कोई संबंध रहा है। इसके लिए उनके आपराधिक रिकॉर्ड, पुराने मामलों और पिछले कुछ समय की गतिविधियों की जांच की जा रही है।

    आरोपियों की पुरानी गतिविधियों की जांच

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपी पहले भी पार्क या आसपास के इलाके में महिलाओं को निशाना बनाने जैसी किसी गतिविधि में शामिल रहे हैं। इसके लिए पुलिस उनके पिछले रिकॉर्ड और उपलब्ध सूचनाओं का मिलान कर रही है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों का व्यवहार भी जांच का हिस्सा है। अधिकारियों ने दावा किया है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों में घटना को लेकर कोई पछतावा दिखाई नहीं दिया। यह पुलिस का आकलन है और मामले की जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में इसे नहीं देखा जा सकता।

    फॉरेंसिक जांच से मिल सकती है अहम जानकारी

    तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। जांचकर्ता फोन से हटाई गई जानकारी, सर्च हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा की पड़ताल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना से पहले और बाद में आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क हुआ था और क्या घटना से संबंधित कोई डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध है।

    मामले में पुलिस घटनास्थल से जुड़े भौतिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। कथित रूप से हथियारों की बरामदगी, कपड़े धोने और आरोपियों के पार्क के आसपास लगातार आने-जाने से जुड़े पहलुओं को जांच में शामिल किया गया है।

    पीड़िता और उसके दोस्त के बयान भी मामले की जांच में महत्वपूर्ण हैं। पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए उपलब्ध प्रत्यक्ष और तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र कर रही है।

    कानूनी जांच जारी

    आस्था कुंज पार्क में हुई इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की जांच अब केवल कथित अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपियों की पिछली गतिविधियों और संभावित समान घटनाओं से जुड़े पहलुओं तक भी बढ़ गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की कोई वारदात की थी या यह घटना एक अलग मामला है।

    फिलहाल मामले में सामने आए कई विवरण पुलिस सूत्रों और जांच से जुड़े दावों पर आधारित हैं। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी। तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की आगे की जांच से मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    दिल्ली हाईकोर्ट ने SFI के Instagram अकाउंट ब्लॉक होने की अपील पर केंद्र को तीन सप्ताह में फैसला लेने को कहा
    Next Article
    दिल्ली में नाबालिगों की सुरक्षा पर सवाल: 14 दिनों में चार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment