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    देश के पहले फॉरेंसिक साइंस हैकाथॉन में छात्रों ने सुलझाईं केस जांच की जटिलताएं

    6 days ago

    -प्रज्ञान 2026 में सुरक्षा और तकनीक का संगम, पुलिस और सीआईएसएफ़ अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

     

    जयपुर,

     

    सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करने और युवाओं को डिजिटली सुरक्षित करने के लिए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक साइंस विभाग द्वारा फॉरेंसिक साइंस और साइबर इंटेलिजेंस के विषय पर आधारित दो-दिवसीय राष्ट्रीय समिट 'प्रज्ञान 2026' की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम में सुरक्षा और तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 

     

    इस दौरान, सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ़) के 50 अधिकारियों और राजस्थान पुलिस के 35 जवानों को इंडस्ट्री व एकेडमिक विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सके। साथ ही, स्टूडेंट्स, गैट-सैट-इन्वेस्टीगेट 4.0 व देश के पहले फॉरेंसिक साइंस हैकाथॉन में आधुनिक तकनीकों की मदद से केस फाइल जांच की जटिलताओं को समझने और सुलझाने का प्रयास करेंगे।

     

    इस आयोजन में देशभर के 25 संस्थानों से 140 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध ग्राफोलॉजिस्ट और बिहेवियरल एनालिस्ट आस्था कालरा ने अपने सत्र में लिखावट और व्यवहार के विश्लेषण के माध्यम से मानव मनोविज्ञान को समझने के आयाम प्रस्तुत किए।

     

    उद्घाटन अवसर पर ‘डीजी सुरक्षा इनिशिएटिव’ की शुरुआत भी की गई, जिसका उद्देश्य कैंपस और समाज में साइबर सुरक्षा और डिजिटल स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस पहल के जरिए इंडस्ट्री और अकादमिक सत्रों के साथ साइबर एन्फोर्समेंट के माध्यम से छात्रों में प्रोफेशनल एथिक्स और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित की जाएगी।

     

    मुख्य अतिथि डॉ. आलोक त्रिपाठी (वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व वाईस चांसलर, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पुलिस, जोधपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय के साथ पुलिसिंग अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और डेटा आधारित हो गई है। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों और साइबर पेट्रोलिंग जैसे विषयों पर छात्रों का मार्गदर्शन किया।

     

    गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. रंजीत सिंह (डायरेक्टर एवं सीईओ, एसआईएफ़एस इंडिया फ़ोरेंसिक लेबोरेटरी, नई दिल्ली) ने विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहकर निरंतर सीखने और भविष्य में रोजगार सृजन करने की प्रेरणा दी। वहीं, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ निखिल महादेश्वर (फाउंडर, साइबर सिक्योर्ड इंडिया, मुंबई) ने डिजिटल खतरों से सतर्क रहने और समाज को सुरक्षित रखने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

     

    कार्यक्रम में अर्पित अग्रवाल (वाईस चेयरपर्सन, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी) ने साइबर जागरूकता को आवश्यक जीवन कौशल बताते हुए फॉरेंसिक साइंस और साइबर इंटेलिजेंस के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की। वहीं, वाइस चांसलर प्रो. विक्टर गंभीर ने छात्रों के लिए एआई शिक्षा को अनिवार्य बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने पर बल दिया।

     

    फॉरेंसिक साइंस हैकाथॉन जैसे आयोजन युवाओं के लिए बहुत ही उपयोगी और सीखने वाले साबित होते हैं। इनमें छात्रों को सिर्फ किताबों तक सीमित रहने के बजाय असली केस जैसे उदाहरणों पर काम करने का मौका मिलता है। वे आधुनिक तकनीकों की मदद से यह समझते हैं कि किसी मामले की जांच कैसे की जाती है, सबूतों को कैसे परखा जाता है और सही निष्कर्ष तक कैसे पहुंचा जाता है। 

     

    वैष्णवी ठाकरे (हैड- डिपार्टमेंट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस) ने बताया कि इससे स्टूडेंट्स की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है और वे समस्याओं का हल निकालने में अधिक सक्षम बनते हैं।

     

    ऐसे आयोजनों से छात्रों की तकनीकी समझ भी मजबूत होती है और वे नई-नई डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से परिचित होते हैं, जो आज के समय में बहुत जरूरी है। साथ ही, यह अनुभव उन्हें आगे चलकर साइबर क्राइम, पुलिस जांच, फॉरेंसिक साइंस और अन्य सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए तैयार करता है। कुल मिलाकर, इस तरह के हैकाथॉन युवाओं को आत्मविश्वासी, जागरूक और भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार बनाते हैं।

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