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    दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा को न करें नज़रअंदाज़: 15 ज़रूरी चाइल्ड सेफ्टी टिप्स और 6 सेल्फ-केयर आदतें, जो हर बच्चे को सिखानी चाहिए

    2 months ago

    पटाखों की चकाचौंध में न खो जाए मासूमियत, त्योहार की खुशियों संग बच्चों की सुरक्षा भी है उतनी ही जरूरी

    जयपुर। दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे नज़दीक आता है, बच्चों का उत्साह आसमान छूने लगता है। नए कपड़े, रंगीन लाइटें, मिठाइयों की मिठास और पटाखों की चमक—सब कुछ उन्हें बेहद रोमांचित कर देता है। लेकिन यही खुशी कई बार लापरवाही में बदल जाती है और बच्चे अनजाने में खुद को खतरे में डाल लेते हैं।

    हर साल देशभर में सैकड़ों बच्चे पटाखों, दीयों या बिजली की सजावट से झुलसने, चोट लगने और प्रदूषण से बीमार होने की घटनाओं का शिकार बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहार की मस्ती के साथ माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।


    क्यों जरूरी है दिवाली पर बच्चों की सेफ्टी पर फोकस करना?

    साइकोलॉजिस्ट और फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर डॉ. अमिता श्रृंगी बताती हैं कि बच्चे दिवाली के माहौल में खतरे का अनुमान नहीं लगा पाते। दीये, पटाखे और इलेक्ट्रिक झालरों की चमक उन्हें आकर्षित करती है, लेकिन इन्हीं से हादसे भी हो सकते हैं। “जरूरी है कि माता-पिता सजग रहें और बच्चों को सुरक्षा नियमों की जानकारी दें,” डॉ. श्रृंगी कहती हैं।


     दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा के 15 ज़रूरी टिप्स

    1. बच्चों को अकेले बाहर न जाने दें

    गलियों में लगातार पटाखे फूटते रहते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा रहता है। बच्चों को हमेशा किसी वयस्क की निगरानी में रखें और उन्हें घर के सुरक्षित हिस्से में खेलने दें।

    2. पटाखों का धुआं बच्चों से दूर रखें

    पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चों के फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कोशिश करें कि बच्चे घर के अंदर रहें और बाहर निकलें तो मास्क पहनें।

    3. बिजली की झालरों से सतर्क रहें

    रंगीन लाइटें आकर्षक लगती हैं, पर इनमें करंट और शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर लगाएं और खराब तारों की जांच करें।

    4. तेज आवाज वाले पटाखों से बचाएं

    पटाखों की तेज आवाज बच्चों की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है और उन्हें डर या तनाव भी दे सकती है। ऐसे में इयरमफ्स या कान ढकने का कोई उपाय रखें।

    5. सुरक्षित आतिशबाजी कराएं

    सिर्फ लाइसेंस प्राप्त दुकानों से पटाखे खरीदें। बच्चों को अनार, फुलझड़ी या छोटे फाउंटेन जैसे हल्के पटाखे ही दें और कभी अकेले उन्हें जलाने न दें।

    6. दीयों और मोमबत्तियों से दूरी बनाएं

    दीयों को स्थिर और सपाट जगह पर रखें, ताकि गिरने से आग न लगे। बच्चों को दीयों या मोमबत्तियों से खेलने न दें।

    7. इमरजेंसी की तैयारी रखें

    घर में फर्स्ट एड बॉक्स, पानी की बाल्टी और यदि संभव हो तो फायर एक्सटिंग्विशर रखें। बच्चों को पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के नंबर याद कराएं।

    8. खानपान पर ध्यान दें

    त्योहार में मिठाइयों और तली-भुनी चीजों की भरमार होती है। बच्चों को सीमित मात्रा में खिलाएं और खाने की चीजें भरोसेमंद जगह से खरीदें।

    9. सिंथेटिक कपड़ों से बचें

    पटाखे जलाते समय बच्चों को हमेशा कॉटन के कपड़े पहनाएं। सिंथेटिक कपड़े चिंगारी पकड़ लेते हैं, जिससे जलने का खतरा रहता है।

    10. खुले बाल न रखें

    बच्चियों को पटाखों या दीयों के आसपास खुले बालों में न रहने दें, इससे चिंगारी लगने की संभावना रहती है।

    11. भीड़भाड़ से दूर रखें

    भीड़भाड़ वाले इलाकों में पटाखे या सजावट से हादसे का खतरा बढ़ता है। बच्चों को भीड़भाड़ से बचाएं।

    12. प्रदूषण वाले इलाकों में कम समय बिताएं

    धुएं और धूल से बच्चों में सांस की दिक्कत हो सकती है। दिवाली के बाद कुछ दिन उन्हें बाहर खेलने से रोकें।

    13. पानी की बाल्टी पास रखें

    पटाखे जलाते समय पास में हमेशा पानी या रेत रखें ताकि चिंगारी से आग लगे तो तुरंत बुझाई जा सके।

    14. सजावट में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल न करें

    कागज़, रिबन या प्लास्टिक जैसी चीजों से सजावट आग पकड़ सकती है। इनसे बचें।

    15. हादसे की स्थिति में घबराएं नहीं

    जलने या चोट लगने पर तुरंत ठंडा पानी डालें और डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज बड़ा नुकसान टाल सकता है।


     बच्चों को सिखाएं ये 6 सेल्फ-केयर टिप्स

    बच्चों को खुद की सुरक्षा का भी ज्ञान होना चाहिए ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में सही कदम उठा सकें।

    1. दीयों और पटाखों से दूरी बनाए रखना सीखें।
    2. कपड़ों में आग लगे तो दौड़ें नहीं, नीचे लेटकर लुढ़कें।
    3. खराब तार या बल्ब को हाथ न लगाएं।
    4. किसी को जलते या घायल देखें तो तुरंत बड़ों को बुलाएं।
    5. धुएं या तेज गंध महसूस हो तो तुरंत बाहर निकलें।
    6. खतरा महसूस हो तो इमरजेंसी नंबर डायल करना सीखें।

    पटाखों के बजाय बच्चों के लिए सुरक्षित विकल्प

    बच्चों को पटाखों की जगह रंगोली बनाना, दीये सजाना, पेपर लालटेन तैयार करना या घर सजाने में मदद करना जैसी गतिविधियों में शामिल करें। इससे उनका उत्साह बना रहेगा और जोखिम भी नहीं होगा।


    दिवाली सिर्फ रोशनी नहीं, ज़िम्मेदारी का त्योहार भी है

    दिवाली का असली अर्थ सिर्फ दीप जलाना नहीं, बल्कि अपने घर, समाज और बच्चों के जीवन में सुरक्षा और जागरूकता की लौ जलाना है।
    बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करके ही हम इस त्योहार की खुशी को सच्चे अर्थों में पूर्ण बना सकते हैं।


     

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