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    देवरापल्ली आश्रम विद्यालय में भोजन से बीमार पड़े छात्रों की हालत में सुधार, 35 को अस्पताल से छुट्टी

    2 months ago

    Yugcharan / 09 फरवरी 2026

    आंध्र प्रदेश के पोलावरम जिले के रामपचोदवरम मंडल अंतर्गत देवरापल्ली स्थित सरकारी आदिवासी कल्याण आश्रम विद्यालय (बालक) में भोजन के बाद बीमार पड़े छात्रों की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को 35 छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि 10 छात्रों को एहतियातन चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। शेष छात्रों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

    यह घटना 7 फरवरी को सामने आई थी, जब आश्रम विद्यालय-सह-छात्रावास में परोसे गए नाश्ते के बाद बड़ी संख्या में छात्रों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाश्ता पूरी तरह पकाया नहीं गया था, जिसके बाद लगभग 106 छात्र अस्वस्थ हो गए थे। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और छात्रों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया।

    कई स्वास्थ्य केंद्रों में कराया गया इलाज

    बीमार छात्रों को रामपचोदवरम क्षेत्रीय अस्पताल और मारेडुमिल्ली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया, जिसमें तरल पदार्थ, आवश्यक दवाइयां और निरंतर निगरानी शामिल थी। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने के कारण किसी भी छात्र की हालत गंभीर नहीं हुई।

    सोमवार को जिन 35 छात्रों को छुट्टी दी गई, वे पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। हालांकि, चिकित्सकों ने 10 छात्रों को अगले कुछ दिनों तक निगरानी में रखने की सलाह दी है, ताकि किसी प्रकार की जटिलता की संभावना को पूरी तरह से खारिज किया जा सके।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने किया दौरा

    घटना की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी कल्याण विभाग के प्रभारी निदेशक वी. प्रसन्न वेंकटेश और पोलावरम जिले के संयुक्त कलेक्टर बी. स्मरण राजू ने सोमवार को देवरापल्ली आश्रम विद्यालय और अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने बीमार छात्रों से बातचीत की, उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभाल रही है।

    अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी प्रभावित छात्रों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और किसी भी तरह की लापरवाही न हो। साथ ही, विद्यालय परिसर में साफ-सफाई और रसोई व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

    जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

    आदिवासी कल्याण विभाग के प्रभारी निदेशक को इस पूरे मामले पर एक विस्तृत जमीनी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, किचन प्रबंधन, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका की जांच शामिल होगी।

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रावासों और आश्रम विद्यालयों में बच्चों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    अभिभावकों में चिंता, लेकिन राहत भी

    घटना की खबर फैलते ही कई अभिभावक अस्पताल और विद्यालय पहुंच गए थे। शुरू में बच्चों की तबीयत को लेकर चिंता का माहौल था, लेकिन अब अधिकांश छात्रों के स्वस्थ होने से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। कुछ अभिभावकों ने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कड़े कदम उठाने की मांग भी की है।

    भोजन व्यवस्था पर उठे सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर सरकारी छात्रावासों और आश्रम विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में संचालित आवासीय विद्यालयों में नियमित निरीक्षण और सख्त मानकों की जरूरत है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।

    सरकार ने दिया आश्वासन

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि देवरापल्ली की घटना से सबक लेकर सभी आश्रम विद्यालयों में भोजन व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जाएगी। रसोई कर्मचारियों के प्रशिक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण जैसे कदमों को और सख्त बनाया जाएगा।

     

    फिलहाल, देवरापल्ली आश्रम विद्यालय में स्थिति नियंत्रण में है और छात्रों की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। Yugcharan News इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा।

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