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    वंदे मातरम्” गीत के 150 वर्ष : भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया

    2 months ago

    राजनीतिविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भाषण प्रतियोगिता का प्रभावी और गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मातृभूमि के प्रति गहन सम्मान, राष्ट्रीय चेतना, और स्वतंत्रता संग्राम की अविस्मरणीय स्मृतियों को नमन करने हेतु समर्पित रहा। अध्यक्षता एवं आयोजन संरचना • अध्यक्षता : प्रो. (डॉ.) राजेश कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष • कार्यक्रम संयोजक : डॉ. सुमन मौर्य • सह-संयोजक : प्रियंका आर्य • आयोजन सचिव : डॉ. गजेंद्र सिंह भाषण प्रतियोगिता का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य वक्ताओं ने 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित “वंदे मातरम्” की 150 वर्ष लंबी सांस्कृतिक, राजनीतिक और प्रेरणात्मक यात्रा पर विस्तृत चर्चा की। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. राजेश कुमार शर्मा ने कहा— “वंदे मातरम् वह शक्ति-स्रोत था जिसने स्वतंत्रता सेनानियों के हृदय में साहस, त्याग और संकल्प की अग्नि जागृत की। यह गीत आज भी भारतीय लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और हमारी राष्ट्रीय पहचान की आत्मा बनकर जीवित है।” कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुमन मौर्य ने वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि— • यह गीत 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। • 1882 में आनंदमठ उपन्यास में शामिल होकर यह जन-जन तक पहुँचा। • रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया जिससे यह राष्ट्रीय चेतना का सशक्त प्रतीक बन गया। • 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके पहले दो पदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। • 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सममानित दर्जा प्रदान करने की घोषणा की। भाषण प्रतियोगिता “भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ प्रेरक पुंज” विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिणाम इस प्रकार रहे— • प्रथम स्थान : अक्षत अग्रवाल • द्वितीय स्थान : श्रवण कुमार • तृतीय स्थान (संयुक्त) : संग्राम, सुप्रिया एवं किशन कुमार कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन प्रियांशु भारद्वाज ने किया। वंदे मातरम्—हमारी राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक आयोजन सचिव डॉ. गजेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा— “‘वंदे मातरम्’ के दो शब्दों ने पूरे राष्ट्र में स्वतंत्रता, आत्मबल और राष्ट्रीय गौरव की ज्वाला प्रज्वलित की। युग बदल गए, पर इस गीत की प्रेरणा आज भी उतनी ही जीवंत और अक्षुण्ण है।” समापन कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा सामूहिक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ के उत्साहपूर्ण गायन से हुआ, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को देशभक्ति, गौरव और भावनात्मक एकता से अभिभूत कर दिया ।

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