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    यह मंचन ग़ालिब को सिर्फ़ दिखाता नहीं, बल्कि ग़ालिब की नज़र से उनकी अपनी दास्तान महसूस करवाता है – 1857 ग़ालिब

    2 months ago

    –कला का भविष्य, इतिहास की आवाज़— जेईसीआरसी ने ग़ालिब को नए युग में दर्शाया
    – 1857 ग़ालिब: जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने इतिहास को मंच पर फिर से जीवित किया


    जयपुर,

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में कला और संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए आज प्रसिद्ध नाटक "1857 ग़ालिब" का शानदार मंचन किया गया। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के कलात्मक पहल केंद्र, सेंटर ऑफ़ आर्ट्स एंड इंडियाज़, द्वारा प्रस्तुत इस नाटक में उर्दू के महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन और 1857 के विद्रोह के दौरान उनके अनुभवों की एक नई कहानी को दर्शाया गया। नाटक का निर्देशन डॉ. रवि चतुर्वेदी ने किया, जबकि इसकी भावपूर्ण कहानी मुमताज़ शेख द्वारा लिखी गई थी। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को उस ऐतिहासिक कालखंड में ले जाकर ग़ालिब के साहित्यिक और व्यक्तिगत संघर्षों से परिचित कराया, जिसने कलात्मक अभिव्यक्ति के प्रति यूनिवर्सिटी के गहरे दृष्टिकोण को दर्शाया।

    इस कार्यक्रम के मंचन में अभिनेताओं की अटूट प्रतिबद्धता एक प्रेरणादायक कहानी बनकर उभरी। निर्देशक डॉ. रवि चतुर्वेदी ने इस नाटक को मंचित करने के पीछे की प्रेरणा को साझा करते हुए बताया कि वे ग़ालिब की कहानी के वे अनसुने पहलू दिखाना चाहते थे जिनसे लोग अज्ञात हैं, और उन्हें ड्रामा के रूप में प्रस्तुत करना अत्यंत मनोरंजक अनुभव रहा। उन्होंने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, "बच्चों से शुद्ध उर्दू बुलवाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने बहुत शिद्दत से मेहनत की और अपनी लगन से इस चुनौती को पार करके दिखाया।”

    इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन अमित अग्रवाल और  सेंटर फॉर आर्ट्स एंड इंडियाज़ के चेयरमैन डॉ. प्रसन्ना के. खामेसरा भी मौजूद रहे।

    यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन अमित अग्रवाल ने बताया कि यह प्रस्तुति सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि हमारे छात्रों की भविष्य-निहैर्माण क्षमता और अद्भुत प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। चुनौतियों के बीच दिखाई गई उनकी ऊर्जा और अनुशासन आने वाली कला-परंपराओं को नई दिशा देगा। उन्होंने आगे कहा कि वे डॉ. रवि चतुर्वेदी और मुमताज़ शेख के नवाचारी दृष्टिकोण की हार्दिक सराहना करते हैं, जिन्होंने कला और संस्कृति के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी का गौरव बढ़ाया है।


    इस प्रस्तुति ने सिद्ध किया कि जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी केवल कला को मंच नहीं देती, बल्कि नई सांस्कृतिक यात्राओं की शुरुआत भी करती है।

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