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    युमनाम खेमचंद सिंह बने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री, करीब एक साल बाद समाप्त हुआ राष्ट्रपति शासन

    1 month ago

    मणिपुर में लगभग एक वर्ष से लागू राष्ट्रपति शासन का अंत बुधवार को हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों और दो मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस प्रकार भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार ने औपचारिक रूप से राज्य की कमान संभाल ली।

    राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में शाम करीब छह बजे युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। वे 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद मणिपुर के दूसरे मुख्यमंत्री बने हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री रहे एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

    विविध समुदायों का प्रतिनिधित्व

    नई सरकार के गठन में मणिपुर की सामाजिक विविधता को ध्यान में रखने की कोशिश की गई है। भाजपा की कांगपोकपी सीट से विधायक नेमचा किपगेन, जो कूकी-जो समुदाय से आती हैं, और नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोस्सी डिखो, जो नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल माध्यम से शपथ ली, जबकि लोस्सी डिखो ने इंफाल में समारोह में हिस्सा लिया।

    इसके अलावा, भाजपा के गोविंदास कोंथौजाम और नेशनल पीपुल्स पार्टी के खुराइजाम लोकेन सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। दोनों ही मैतेई समुदाय से आते हैं। इस तरह मंत्रिमंडल में राज्य की प्रमुख जातीय और सामाजिक इकाइयों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

    शांति और विकास को प्राथमिकता

    शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि मणिपुर में कुल 36 समुदाय हैं और सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति इसी सोच का हिस्सा है, ताकि बड़े समुदायों को प्रतिनिधित्व मिल सके।

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने और विकास को गति देने की जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन सरकार की प्राथमिकता शांति बहाली और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाना होगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई सरकार को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह टीम मणिपुर के लोगों के कल्याण, विकास और समृद्धि के लिए ईमानदारी से काम करेगी।

    विरोध और चेतावनियां

    हालांकि नई सरकार के गठन को लेकर सभी वर्गों में सहमति नहीं है। कूकी-जो समुदाय से जुड़े कुछ संगठनों ने अपने विधायकों को सरकार में शामिल न होने की सलाह दी थी। इन संगठनों का कहना है कि जब तक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक सरकार में भागीदारी उचित नहीं है।

    इन संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई कूकी-जो विधायक सामूहिक निर्णय के खिलाफ जाकर सरकार में शामिल होता है, तो उसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत होगी। इसके बावजूद नेमचा किपगेन का उपमुख्यमंत्री बनना राजनीतिक दृष्टि से एक अहम कदम माना जा रहा है।

    बीते संघर्ष की छाया

    गौरतलब है कि मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा ने मणिपुर को गहरे संकट में डाल दिया था। इस दौरान सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। बड़ी संख्या में लोग आज भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसे की बहाली और सभी समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना है।

    उपमुख्यमंत्री लोस्सी डिखो ने कहा कि सरकार केंद्र द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन लोगों तक पहुंचेगा और शासन में पारदर्शिता तथा समावेशिता सुनिश्चित की जाएगी।

    आगे की राह

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार का गठन मणिपुर के लिए एक नई शुरुआत हो सकता है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शांति प्रक्रिया कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ती है। सामाजिक विश्वास बहाली, विस्थापितों का पुनर्वास और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन आने वाले महीनों में सरकार की प्राथमिक कसौटी होगी।

     

    करीब एक साल बाद चुनी हुई सरकार की वापसी से यह संकेत जरूर मिला है कि संवैधानिक प्रक्रिया फिर से पटरी पर आ रही है। अब देखना यह होगा कि नई नेतृत्व वाली सरकार मणिपुर को स्थिरता और शांति की दिशा में कितनी दूर तक ले जा पाती है।

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