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    आर्ट में थर्ड डायमेंशन : 36 थालियों में संजोई माँ की यादें, कला साहित्य का दिखा संगम

    3 months ago

    वृद्धि सावलानी की कला में दिखा संवेदना, स्मृति और परंपरा का अद्भुत संगम

    जयपुर।

    जयपुर आर्ट वीक के अंतर्गत राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में प्रदर्शित युवा आर्टिस्ट वृद्धि सावलानी की इंस्टॉलेशन ‘प्लेट ऑफ होम’ कला प्रेमियों के लिए भावनाओं से भरा एक अनूठा अनुभव बनकर सामने आई है। यह इंस्टॉलेशन केवल कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि माँ की स्मृतियों, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक परंपराओं का सजीव दस्तावेज़ है।

    इस इंस्टॉलेशन में 36 पीतल की थालियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें प्रत्येक थाली कलाकार की माँ के जीवन के एक-एक वर्ष की कहानी कहती है। माँ के 36 वर्ष के जीवन को प्रतीकात्मक रूप से सहेजती ये थालियाँ स्मृति, संवेदना और समय के प्रवाह को दर्शाती हैं। वृद्धि सावलानी ने अपने इस कार्य के माध्यम से माँ को याद करते हुए कहा कि यह उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि माँ से संवाद का माध्यम है।

    पीतल का चयन जानबूझकर किया गया, क्योंकि भारतीय परंपरा में विवाह के समय थालियाँ देने की विशेष मान्यता है। किन्तु सामाजिक कारणों से यह रस्म उनकी माँ को नहीं मिल पाई थी। इस इंस्टॉलेशन के माध्यम से वृद्धि ने उस अधूरी परंपरा को पूर्ण करने का भावनात्मक प्रयास किया है। उनके अन्य आर्टवर्क ‘सेकंड स्किन’ और ‘इन हैंड्स’ में भी स्पर्श, टेक्सचर और एहसास के माध्यम से स्मृतियों को जीवंत किया गया है। बरनियों में भरी गंध, मसाले, बिस्किट क्रम्ब्स, आटा और मिट्टी समय के साथ बदलती यादों की सुगंध बनकर सामने आती हैं।

    गौरतलब है कि वृद्धि सावलानी, दीपशिखा ग्रुप के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना की नवासी हैं। इस अवसर पर डॉ. प्रेम सुराना ने अपने संदेश में कहा कि “वृद्धि की कला संवेदनशीलता, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। कला जब भावनाओं से जुड़ती है, तब वह समाज को सोचने पर मजबूर करती है।”

    वहीं दीपशिखा ग्रुप के वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने कहा कि “आज की युवा पीढ़ी यदि अपनी जड़ों, परिवार और मूल्यों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही है, तो यह अत्यंत गर्व की बात है। वृद्धि का यह कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।”

    वृद्धि सावलानी की यह प्रस्तुति जयपुर आर्ट वीक में आने वाले दर्शकों के लिए न केवल देखने योग्य है, बल्कि महसूस करने योग्य अनुभव भी प्रदान करती है, जहाँ यादें समय के साथ बदलकर खुशबू बन जाती हैं।

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