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    असम में SIT रिपोर्ट के बाद सियासी टकराव तेज, केंद्र से जांच की मांग पर आमने-सामने आए हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई

    2 hours ago

    Yugcharan / 08/02/2026

    असम की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला है। विशेष जांच दल (SIT) की एक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को गंभीर बताते हुए मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की आवश्यकता जताई है, वहीं कांग्रेस सांसद ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

    मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को गुवाहाटी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि SIT की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दे संवेदनशील प्रकृति के हैं और इनका दायरा राज्य की सीमाओं से आगे तक जाता है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में पारदर्शिता और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की भूमिका आवश्यक हो जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करेगी और उसकी सहमति के बाद जांच सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    SIT रिपोर्ट में क्या है

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह जांच कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कुछ कथित संपर्कों और गतिविधियों के संदर्भ में शुरू की गई थी। SIT का गठन प्रारंभिक शिकायतों के आधार पर किया गया था और रिपोर्ट हाल ही में राज्य सरकार को सौंपी गई। मुख्यमंत्री का दावा है कि रिपोर्ट में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जिनका संबंध अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से जोड़ा जा रहा है, और इसलिए राज्य स्तर पर इसकी जांच सीमित हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम सरकार अपनी संवैधानिक सीमाओं को समझती है और इसी कारण से एक व्यापक और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने दोहराया कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और प्रशासनिक पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री के आरोप और स्पष्टीकरण

    प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि SIT रिपोर्ट में कुछ ऐसे लेनदेन और यात्राओं का उल्लेख है, जिनकी जांच आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में संबंधित पक्षों के विदेश संपर्कों, कार्य अनुभव और कुछ दस्तावेजी विवरणों का उल्लेख किया गया है, जिनकी पुष्टि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे और तब तक किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की अटकलों या अफवाहों को बढ़ावा नहीं देना चाहती, बल्कि तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने विपक्ष से भी अपील की कि जांच प्रक्रिया में सहयोग किया जाए और इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए।

    गौरव गोगोई की प्रतिक्रिया

    कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता और आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि सरकार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं है और यह पूरी कवायद राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। गोगोई का कहना है कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की पूर्वाग्रहपूर्ण जांच का विरोध करेंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बयानबाजी से न तो जनहित सधता है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है। कांग्रेस सांसद के अनुसार, जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक विवाद खड़े किए जा रहे हैं।

    सियासी बयानबाजी का दौर

    मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद के बीच यह टकराव केवल एक प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं, जिनमें एक-दूसरे के आरोपों को खारिज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो उन्हें इससे अधिक खुशी किसी और बात की नहीं होगी, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल सच्चाई सामने लाना है।

    वहीं, कांग्रेस नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि किसी भी जांच का स्वागत किया जाना चाहिए, बशर्ते वह निष्पक्ष और कानून के दायरे में हो। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

    केंद्र की भूमिका पर नजर

    अब इस पूरे मामले में सबकी निगाहें केंद्रीय गृह मंत्रालय पर टिकी हैं। यदि मंत्रालय राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार करता है, तो जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि जांच का स्वरूप क्या होगा और इसकी समयसीमा कैसे तय की जाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला न केवल असम, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है। एक ओर जहां राज्य सरकार इसे प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़ा विषय बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहा है।

    आगे की राह

    फिलहाल SIT रिपोर्ट और उसके आधार पर उठाए गए कदमों ने असम की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस बात पर निर्भर करेंगे कि केंद्र सरकार किस प्रकार का निर्णय लेती है। तब तक, दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

    राज्य में आम जनता और राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह मामला निष्पक्ष जांच के जरिए किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगा या फिर यह सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। आने वाले समय में जांच की प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्य इस विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।

     
     
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