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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई भ्रम नहीं, हर मंत्री अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है: पीयूष गोयल

    2 hours ago

    Yugcharan / 08/02/2026

    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सरकार के भीतर मतभेद या असमंजस की अटकलों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के भीतर सभी मंत्रालय अपने-अपने दायित्वों के अनुसार काम कर रहे हैं और किसी भी स्तर पर आपसी टकराव या संवाद की कमी नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब समझौते के कुछ पहलुओं और रूस से तेल आयात जैसे मुद्दों को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।

    रविवार को राजधानी में एक बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि हाल के दिनों में दो अलग-अलग विषयों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उनके अनुसार, व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दे और विदेश नीति से संबंधित सवाल अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इसी आधार पर उत्तर दिए जा रहे हैं।

    मंत्रियों के बीच तालमेल पर जोर

    पीयूष गोयल ने इस धारणा को भी खारिज किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा केवल एक मंत्रालय तक सीमित है या अन्य मंत्री इससे अनभिज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर काम करती है और सभी संबंधित मंत्रालयों को आवश्यक जानकारी दी जाती है। उनके अनुसार, “हर मंत्री अपनी जिम्मेदारी समझता है और उसी के अनुसार फैसले लिए जाते हैं।”

    उन्होंने यह भी कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर बातचीत एक सतत प्रक्रिया होती है, जिसमें कई चरण होते हैं। ऐसे में हर चरण की जानकारी सार्वजनिक करना या एक ही समय पर सभी विवरण साझा करना व्यवहारिक नहीं होता। हालांकि, सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और समय आने पर आवश्यक जानकारी संसद और जनता के सामने रखी जाएगी।

    रूस से तेल आयात पर स्थिति स्पष्ट

    रूस से तेल आयात को लेकर उठ रहे सवालों पर पीयूष गोयल ने कहा कि यह विषय सीधे तौर पर विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ा है। इस संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रश्नों का उत्तर विदेश मंत्रालय द्वारा दिया जाना उचित है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है।

    मंत्री ने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति स्पष्ट और संतुलित रही है। भारत ने हमेशा वैश्विक नियमों और अपने घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। रूस से तेल आयात को लेकर भी निर्णय इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत लिए जा रहे हैं।

    किसानों की चिंताओं पर भरोसा

    व्यापार समझौते को लेकर किसानों और किसान संगठनों की आशंकाओं पर भी पीयूष गोयल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से देश के किसानों को नुकसान न पहुंचे। उनके अनुसार, कृषि से जुड़े संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्री के मुताबिक, पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ही समझौते की शर्तों पर बातचीत की जा रही है, ताकि घरेलू कृषि बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विकसित हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित व्यापार समझौते को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बाजार पहुंच, शुल्क संरचना और व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

    हालांकि, इस तरह के समझौतों को लेकर आमतौर पर उद्योग जगत, कृषि क्षेत्र और नीति विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग मत सामने आते हैं। कुछ वर्ग इसे आर्थिक अवसर के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य इसके संभावित प्रभावों को लेकर सतर्क रहते हैं। सरकार का कहना है कि सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सार्वजनिक बहस

    व्यापार समझौते और रूस से तेल आयात जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इन मामलों में अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में गोपनीयता और कूटनीतिक संतुलन आवश्यक होता है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना स्वाभाविक है, लेकिन तथ्यों के बिना अटकलें लगाना सही नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, तस्वीर और स्पष्ट होती जाएगी।

    आगे की दिशा

    फिलहाल, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और सरकार इसे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कह रही है। पीयूष गोयल के बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार आंतरिक समन्वय को लेकर आश्वस्त है और किसी भी तरह के मतभेद की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

     

    आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापार समझौते के ठोस प्रावधान क्या होते हैं और वे भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्योग और कृषि क्षेत्र को किस तरह प्रभावित करते हैं। सरकार का दावा है कि हर कदम सोच-समझकर और व्यापक परामर्श के बाद उठाया जा रहा है, ताकि देश के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रह सकें।

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