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    देश को हिंसा आधारित माओवादी विचारधारा से मुक्त होना होगा: अमित शाह

    2 hours ago

    Yugcharan / 08/02/2026

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश को ऐसी विचारधाराओं से आगे बढ़ना होगा जो हिंसा के रास्ते पर चलकर समस्याओं का समाधान तलाशती हैं। उन्होंने माओवादी विचारधारा को विकास विरोधी बताते हुए कहा कि इससे न तो आदिवासी क्षेत्रों में स्थायी प्रगति हुई और न ही सामाजिक स्थिरता आई। श्री शाह ने माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि जो लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज के साथ जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं।

    रविवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि माओवाद का संबंध न तो विकास की कमी से है और न ही केवल कानून-व्यवस्था से, बल्कि यह एक ऐसी सोच है जो समस्याओं के समाधान के लिए संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों के बजाय हथियारों पर भरोसा करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हिंसा आधारित विचारधाराओं के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

    आत्मसमर्पण की अपील और पुनर्वास का भरोसा

    अमित शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य संघर्ष को लंबा खींचना नहीं है, बल्कि स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित करना है। इसी संदर्भ में उन्होंने माओवादी संगठनों से जुड़े लोगों से आत्मसमर्पण की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था की जाएगी।

    गृह मंत्री ने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति का मकसद केवल सुरक्षा कार्रवाई नहीं, बल्कि उन लोगों को नया अवसर देना है, जो किसी कारणवश हिंसा के रास्ते पर चले गए। उन्होंने यह भी कहा कि कई पूर्व उग्रवादी अब सामान्य जीवन जी रहे हैं और विकास से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं।

    विकास बनाम विचारधारा पर जोर

    अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि किसी भी राज्य या देश के संचालन में विचारधारा की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल फाइलों और आदेशों से नहीं चलता, बल्कि उसे एक स्पष्ट दृष्टि और दिशा की आवश्यकता होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने महात्मा गांधी के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें राजनीति को विचारधारा से अलग करने को अनुचित बताया गया था।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में माओवादी प्रभाव रहा है, वहां विकास की गति बाधित हुई। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे पीछे रह गए। गृह मंत्री के अनुसार, जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां संवाद और सहमति से समाधान निकलते हैं, जबकि हिंसा केवल भय और अस्थिरता को जन्म देती है।

    माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्रों की स्थिति

    अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से माओवादी प्रभावित इलाकों में स्थिति में सुधार आया है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में सुरक्षा हालात बेहतर हुए हैं, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिली है। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सड़कें बनने से स्थानीय लोगों के जीवन में बदलाव देखने को मिला है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सुरक्षा अभियान चलाना नहीं, बल्कि उन इलाकों में भरोसे का माहौल बनाना है, ताकि लोग बिना डर के अपने भविष्य के बारे में सोच सकें। इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय के साथ योजनाएं लागू की जा रही हैं।

    राजनीतिक संदर्भ और वैचारिक बहस

    गृह मंत्री ने अपने भाषण में व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी विचारधारा की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी सोच के साथ काम करते हैं, लेकिन हिंसा को किसी भी रूप में वैध नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में बदलाव का रास्ता चुनाव और संवाद से होकर गुजरता है, न कि भय और दबाव से।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ राज्यों में लंबे समय तक एक विशेष विचारधारा के शासन के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी राज्य या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विचारधारात्मक बहस के माध्यम से विकास के मॉडल पर चर्चा करना है।

    छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष और भविष्य की दिशा

    छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमित शाह ने राज्य की उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों पर बात की। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी विकास की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में राज्य माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त होकर तेज विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।

    गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ को हर संभव सहायता देगी, चाहे वह सुरक्षा के क्षेत्र में हो या विकास योजनाओं के माध्यम से। उन्होंने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल से ही स्थायी समाधान संभव है।

    संतुलन और संवाद की जरूरत

    अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा के बजाय संवाद, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन बनाए रखने की है। जहां आवश्यक हो वहां कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, लेकिन साथ ही समाज की मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक लोगों को अवसर भी दिया जाएगा।

     

    उन्होंने कहा कि देश का भविष्य शांति, समावेशन और विकास में है, न कि टकराव और भय में। इसी सोच के साथ सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रही है, ताकि वहां के नागरिक भी देश की प्रगति में बराबरी के साथ भागीदार बन सकें।

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