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    भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों को राहत नहीं, टेस्ला के लिए बढ़ी चुनौतियां

    3 months ago

    भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इस समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कोई स्पष्ट रियायत न दिए जाने से अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला को बड़ा झटका लगा है। समझौते के प्रावधानों से संकेत मिलता है कि भारत ने पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली महंगी अमेरिकी कारों पर आयात शुल्क में कटौती तो की है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

    सरकारी स्तर पर दी गई जानकारी के अनुसार, अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने उच्च श्रेणी की अमेरिकी पेट्रोल कारों पर आयात शुल्क को पहले घोषित 100 प्रतिशत से अधिक के स्तर से घटाकर 30 प्रतिशत तक लाने पर सहमति जताई है। यह कटौती चरणबद्ध तरीके से अगले कुछ वर्षों में लागू की जाएगी। इसके अलावा, अमेरिका की प्रतिष्ठित मोटरसाइकिल ब्रांड हार्ले-डेविडसन की बाइकों पर आयात शुल्क समाप्त करने का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए किसी प्रकार की विशेष छूट का उल्लेख नहीं किया गया है।

    इलेक्ट्रिक वाहनों को बाहर रखने का संकेत

    अधिकारियों के मुताबिक, यह समझौता मुख्य रूप से आंतरिक दहन इंजन वाली बड़ी क्षमता की कारों तक सीमित है। इलेक्ट्रिक कारों को शामिल न किए जाने से यह साफ हो गया है कि फिलहाल भारत सरकार इस श्रेणी के वाहनों के लिए आयात शुल्क में ढील देने के पक्ष में नहीं है। इससे टेस्ला जैसी कंपनियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है, जो लंबे समय से भारत में कम शुल्क पर इलेक्ट्रिक कारें लाने की मांग कर रही थीं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन नीति और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने की रणनीति से जुड़ा हुआ है। सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन और तकनीकी विकास को प्राथमिकता देना चाहती है।

    यूरोपीय देशों से तुलना

    इस निर्णय की तुलना यूरोपीय देशों के साथ भारत के हालिया व्यापार समझौतों से भी की जा रही है। यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों में कई श्रेणियों के वाहनों पर आयात शुल्क में उल्लेखनीय कटौती की गई है, जिसमें कुछ इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं। इसके उलट, अमेरिका के साथ हुए इस अंतरिम समझौते में इलेक्ट्रिक कारों को शामिल न करना कई विश्लेषकों के लिए आश्चर्य का विषय है।

    भारत में टेस्ला की स्थिति

    टेस्ला ने भारतीय बाजार में वर्ष 2025 के मध्य में प्रवेश किया था। शुरुआत में कंपनी को लेकर उत्साह देखा गया, लेकिन बीते महीनों में उसकी बिक्री अपेक्षाकृत कमजोर रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, टेस्ला भारत में जितनी कारें आयात कर पाई, उनमें से बड़ी संख्या की बिक्री अब तक पूरी नहीं हो सकी है। कई ग्राहकों ने शुरुआती बुकिंग के बाद खरीदारी से पीछे हटने का फैसला किया।

    कंपनी को भारतीय बाजार में ऊंची कीमतों, सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टेस्ला की कुछ लोकप्रिय मॉडल्स की कीमत भारत में अन्य प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में अधिक है, जिससे ग्राहक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता रुझान

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इस क्षेत्र में लगातार नए मॉडल पेश कर रही हैं। कई उपभोक्ता ऐसे वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो अपेक्षाकृत किफायती हों और जिनमें स्थानीय सेवा नेटवर्क मजबूत हो। इस माहौल में टेस्ला को अपनी पहचान बनाने में अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ग्राहकों ने टेस्ट ड्राइव के बाद अन्य ब्रांड्स की ओर रुख किया है, जिनमें बेहतर फीचर्स या कम कीमत का लाभ मिल रहा है। इसके चलते टेस्ला को चुनिंदा मॉडलों पर छूट देने की रणनीति भी अपनानी पड़ी है।

    वैश्विक स्तर पर भी दबाव

    टेस्ला को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते वर्ष कंपनी की वैश्विक बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अन्य इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत जैसे बड़े और उभरते बाजार में अपेक्षित सफलता न मिलना कंपनी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

    व्यापार समझौते का व्यापक संदर्भ

    भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत का परिणाम है। इसके तहत भारत ने कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क में कटौती की है, जबकि अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगाए गए ऊंचे शुल्कों में कमी की है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

    हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर स्पष्ट रुख न अपनाना यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं से समझौता करने के मूड में नहीं है। सरकार का जोर घरेलू उत्पादन, रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर बना हुआ है।

    आगे की राह

    विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्ला के लिए भारत में दीर्घकालिक रणनीति पर दोबारा विचार करना जरूरी हो सकता है। स्थानीय विनिर्माण में निवेश, कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाना और सेवा नेटवर्क को मजबूत करना ऐसे कदम हो सकते हैं, जिनसे कंपनी भारतीय बाजार में अपनी स्थिति सुधार सके।

     

    वहीं, आने वाले महीनों में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली आगे की व्यापार वार्ताओं पर भी नजर रहेगी। यदि भविष्य में व्यापक व्यापार समझौता होता है, तो उसमें इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े प्रावधानों पर दोबारा चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, अंतरिम समझौते ने यह साफ कर दिया है कि भारत अपने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को लेकर सतर्क और संतुलित नीति अपनाए हुए है।

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