Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र की भविष्य संभावनाओं के द्वार खोलने वाला-राज्यपाल

    12 hours ago

    इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ समापन समारोह आयोजित

    सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन पर भी ध्यान देना ज़रूरी

    ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र की भविष्य संभावनाओं के द्वार खोलने वाला-राज्यपाल

     

    जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पत्थर उद्योग और उससे जु़ड़े प्रसंस्करण में सुरक्षित खनन के साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को प्राथमिकता में रखकर कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्थरों के खनन में ही नहीं उनकी विविधता और निर्यात में भी देश में अग्रणी है। उन्होंने  ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ को पत्थर उद्योग और इससे जुड़े शिल्प निर्माण क्षेत्र, उद्यमिता की भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोलने वाला बताया।

     

    राज्यपाल बागडे  ’इण्डिया स्टोनमार्ट 2026‘ के समापन समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पत्थर उद्योग खनन में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि एक परिपक्व उद्योग की नैतिक जिम्मेदारी भी है। इस मार्ट के आयोजन का अर्थ ही है-राजस्थान के पाषाण वैभव से जुड़े विचार का वैश्विक प्रसार। 

    उन्होंने कहा कि भारत के कुल पत्थरों के खनन और प्रंसस्करण राजस्थान का 70 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने संगमरमर, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर के सबसे बड़े उत्पादकों में राजस्थान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि इस समय राजस्थान मे 81 प्रकार के पत्थरों का खनन होता है। इनमे से 57 का व्यावसायिक दोहन होता है।

     

    राज्यपाल ने पत्थर खनन से जुड़ी उद्यमशीलता और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर सभी स्तरों पर कार्य किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर विभिन्न स्टॉल में प्रदर्शित पत्थरों के शिल्प-सौंदर्य और निर्माण कार्यों में उनकी उपयोगिता का अवलोकन करते हुए कहा कि भारतीय पत्थर-उद्योग ने विश्वभर में अब अपनी विशिष्ट  पहचान अब स्थापित कर ली है।

     

     बागडे ने कहा कि पाषाण निर्मित दुर्ग-किले महलों, मंदिरों, हवेलियों से लेकर  आधुनिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर पत्थरों के उपयोग ने निर्माण स्थायित्व, दृढ़ता और सामूहिक स्मृति को सदा जीवंत रखा है।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    सनस्टार स्कूल द्वारा बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित 20वें वार्षिक समारोह एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन
    Next Article
    एनटीए ने नीट यूजी 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment