Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    ज्ञान और कौशल का संतुलन वर्तमान शिक्षा की अहम जरूरत : वासुदेव देवनानी

    1 month ago

    — राजस्थान ज्ञान सभा का दो दिवसीय परिसंवाद का समापन समारोह

    जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि ज्ञान एवं कौशल का प्रभावी संतुलन वर्तमान शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यशैली में परिवर्तन से ही राजस्थान के विकसित होने का ध्येय पूर्ण हो सकेगा। इसके लिए शिक्षा को आध्यमिकता, संवेदनशीलता एवं जीवन मूल्यों से जोड़ना होगा। देवनानी जेईसीआरसी फाउंडेशन परिसर में आयोजित राजस्थान ज्ञान सभा के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। 

     

    राजस्थान में शिक्षा के परिदृश्य पर समग्र चर्चा हेतु जेईसीआरसी विश्वविद्यालय, आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा, शिक्षा विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय परिसंवाद इस शैक्षिक मंथन का विषय 'विकसित राजस्थान हेतु शिक्षा' स्वर्णिम युग की ओर विकसित भारत 2047 रहा। 

     

    *प्रदेश के विकास का आधार है एनईपी-2020*

     

    विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को राजस्थान के विकास का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने नैतिक शिक्षा व सांस्कृतिक अध्ययन, आत्मनिर्भरता, नवाचार, सांस्कृतिक जागरुकता और समावेशी विकास को विकास एवं उन्नति के आवश्यक स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, नैतिकता एवं संवेदनशीलता शिक्षा का अहम हिस्सा है लेकिन ज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर समझता भी जरूरी है। इसी से व्यक्तित्व एवं चरित्र का निर्माण भी होगा और चरित्र निर्माण से ही समग्र विकास संभव है।  देवनानी ने अध्ययन में रचनात्मकता पर जोर दिया।

     

    *शिक्षा की उन्नति में तकनीक जरूरी*

     

    परिसंवाद के दूसरे दिन की शुरुआत 'राजस्थान में कौशल आधारित शिक्षा, रोजगार सृजन एवं आर्थिक परिपेक्ष्य - आत्मनिर्भरता, उद्यमिता एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास' विषय पर परिचर्चा से शुरू हुई। इसमें जाने वाले शिक्षाविद ओम शर्मा ने पैनल की अध्यक्षता करते हुए हा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य परीक्षार्थी नहीं, बल्कि विद्यार्थी बनाने का प्रयास है। उन्होंने उद्योग आधारिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा की उन्नति में तकनीक जरूरी है लेकिन शहरीकरण की दौड़ ठीक नहीं है। पं.दीनदयाल उपाध्याय शेखावटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अनिल रॉय ने पहले प्रयोग और बाद में सिद्धांत की बात कही। न्यास के प्रांत अध्यक्ष प्रो.राजीव सक्सेना भी पैनल में शामिल रहे।

     

    *प्रकृति को आत्मसात करने की जरूरी*

     

    परिसंवाद के अंतिम सत्र में 'राजस्थान की शिक्षा में पर्यावरण एवं सतत विकास पर चिंतन - भावी पीढ़ियों के लिए उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था' विषय पर संवाद हुआ। पैनल में विवेकानंद ग्लोबल कॉलेज के कुलपति एनडी माथुर, पर्यावरण शिक्षा के राष्ट्रीय संयोजक संजय स्वामी, बौद्धिक प्रमुख श्रीकांत और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भारत राम कुमार ने पर्यावरण, प्रकृति के संरक्षण, जैविक कृषि और सतत विकास के लिए प्रकृति से जुड़ने और रोजमर्रा में आत्मसात करने पर जोर दिया। शिक्षाविदों ने स्थानीय क्षेत्रों की मैपिंग, ग्रीन कैंपस एवं प्लास्टिक फ्री कैंपस की आवश्यकता एवं प्रेरणादायी किरदारों वाली कहानियों को पाठ्यक्रमों में शामिल करने पर जोर दिया।

    Click here to Read More
    Previous Article
    ज्ञान एवं कौशल का संतुलन वर्तमान शिक्षा की अहम जरूरत : वासुदेव देवनानी
    Next Article
    शिक्षक संघ (सियाराम) का महासमिति अधिवेशन दौसा में हुआ संपन्न

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment