Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    कोचिंग प्रशासन पर हावी, सरकार का प्राधिकरण कागज़ों तक सीमित — संयुक्त अभिभावक संघ

    2 months ago

    जयपुर। राजधानी जयपुर में कोचिंग संस्थानों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह प्रदेश में कोचिंग संचालक कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को खुली चुनौती दे रहे हैं, जबकि सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद 51 में से केवल 7 कोचिंग संचालकों का बैठक में पहुँचना प्रशासनिक विफलता और कोचिंग माफिया की मनमानी का जीवंत उदाहरण है।

     

    संयुक्त अभिभावक संघ ने सवाल उठाया कि यदि सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार सरकार और प्रशासन ने कोचिंग नियमन के लिए प्राधिकरण का गठन किया है, तो वह केवल कागज़ों में ही क्यों सिमटा हुआ है?

     

    सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जिस बैठक में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित की जानी थी, उसमें नियमानुसार गठित प्राधिकरण के पदाधिकारियों को आमंत्रण ही क्यों नहीं भेजा गया?

     

    क्या सरकार/प्रशासन स्वयं अपने बनाए ढांचे को कमजोर कर रही है?

     

    संघ ने यह भी सवाल खड़ा किया कि अगर प्रदेश में कोचिंग संचालक प्रशासन पर हावी रहेंगे, तो कानून की पालना आखिर कैसे सुनिश्चित होगी?

     

    बैठक में कोचिंग संचालकों की गैर-हाजिरी साफ दर्शाती है कि उन्हें न तो प्रशासन का भय है और न ही कानून का सम्मान।

     

    संयुक्त अभिभावक संघ ने कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि फायर NOC, सुरक्षा मानक, काउंसलर नियुक्ति, ट्रैफिक व्यवस्था और छात्रों के मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को हल्के में लिया जा रहा है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि कोचिंग सेंटरों की मनमानी विद्यार्थियों की जिंदगी से भी बड़ी समझी जा रही है।

    यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।

     

    संघ ने यह भी कहा कि सरकार/प्रशासन केवल चेतावनी देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अवहेलना करने वाले कोचिंग संस्थानों पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा यह मान लिया जाए कि सरकार कोचिंग माफिया के आगे असहाय है।

     

    *संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि -* “प्रदेश में कोचिंग संस्थान कानून से ऊपर नहीं हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और प्रशासन उन्हें ऐसा बनने दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद प्राधिकरण के पदाधिकारियों को बैठक में नहीं बुलाना सरकार/प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है। यदि कोचिंग संचालक प्रशासन पर हावी रहेंगे, तो बच्चों की सुरक्षा, जीवन और भविष्य कौन सुनिश्चित करेगा? संयुक्त अभिभावक संघ यह स्पष्ट करता है कि विद्यार्थियों की जिंदगी किसी भी कोचिंग सेंटर के मुनाफे से बड़ी है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।”

     

    *संयुक्त अभिभावक संघ ने प्रदेश सरकार/प्रशासन से मांग की है कि* - कोचिंग नियमन प्राधिकरण को वास्तविक अधिकार दिए जाएं,

    सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की सख्ती से पालना करवाई जाए,

    नियम तोड़ने वाले कोचिंग संस्थानों पर तत्काल सीलिंग व मान्यता रद्द करने की कार्रवाई हो और विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।

     

     

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    बजट चर्चा की लाइव कार्यवाही को देखने के लिये छात्राओं के लिये एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया
    Next Article
    राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की चुनाव प्रबंधन कार्यशाला एवं सर्वोदय संकल्प शिविर का आयोजन

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment