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    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में द्विदिवसीय विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम सम्पन्न

    2 months ago

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर की शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा द्वारा शिक्षाशास्त्री एवं एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP) के विद्यार्थियों की पाठ्येतर गतिविधियो के अंतर्गत आज द्विदिवसीय विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम का सफल आयोजन एवं समापन किया गया। समापन समारोह में परिसर-निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र, सह-निदेशक प्रो. बोध कुमार झा, प्रो. शीशराम, शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के अध्यक्ष प्रो. गौरांग बाघ, शिक्षाशास्त्री समन्वयक डॉ. ओमप्रकाश, ITEP समन्वयक डॉ. कैलाश चन्द्र सैनी सहित शिक्षाशास्त्र एवं ITEP के समस्त आचार्यगण उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में पंचायतीराज मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार नवीन मिश्र को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भा वैदिक मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण प्रो. शीशराम द्वारा प्रस्तुत किया गया। अपने उद्बोधन में नवीन मिश्र ने ‘सतत् विकास लक्ष्य’ (Sustainable Development Goals) की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन लक्ष्यों का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला तथा स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सतत् विकास केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। युवाओं को नवाचार एवं अनुसंधान के माध्यम से इन लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। द्वितीय सत्र में शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सोहन लाल पाण्डेय ने “आधुनिक समय में शिक्षक की भूमिका और दायित्व” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी उन्नति का युग है, अतः शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों, डिजिटल तकनीकों तथा शोधपरक दृष्टिकोण से समृद्ध होना चाहिए। योग्य शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का विकास करे तथा स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करते हुए प्रेरणास्रोत बने। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. गौरांग बाघ द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा मंच संचालन डॉ. ब्रह्मानन्द प्रधान ने किया। कार्यक्रम में शिक्षाशास्त्री चतुर्थ सत्रार्द्ध एवं ITEP के समस्त विद्यार्थियों के लिए यह द्विदिवसीय व्याख्यान अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुआ। इस अवसर पर डॉ. हरिओम शर्मा, डॉ. दरियाव सिंह, डॉ. अभिनव शर्मा, डॉ. मदन सिंह, डॉ. गुरिन्द्र कौर सहित अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।

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