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    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,विशिष्ट व्याख्यान आयोजित

    3 months ago

    जयपुर।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया।केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र, सह-निदेशक प्रो. बोध कुमार झा एवं प्रो. शीशराम तथा शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के अध्यक्ष प्रो. गौरांग बाघ एवं शिक्षाशास्त्र के आचार्य तथा ITEP के समस्त आचार्य उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में शिक्षाविद् एवं “बोधितत्व सोल कम्पेनियन” की संस्थापिका डॉ. अपर्णा दीक्षित मुख्यावक्ता थी। स्वागत भाषण एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कैलाश चन्द्र सैनी द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. अपर्णा दीक्षित ने भावात्मक बुद्धि के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल बौद्धिक पक्ष ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भावनात्मक संतुलन और संवेदनशीलता भी अत्यंत आवश्यक है। डॉ. दीक्षित ने छात्र-छात्राओं को आत्मचिंतन, आत्मनियंत्रण, समय-प्रबंधन, प्रभावी संवाद-कौशल तथा तनाव-प्रबंधन के उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विषय को सरल और स्पष्ट बनाते हुए सहानुभूति के विकास और सकारात्मक दृष्टिकोण को सफलता का मुख्य आधार बताया तथा विषय ज्ञान के साथ छात्र व्यवहार की भावना को शिक्षक का श्रेष्ठ गुण बताया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र का में शिक्षाविद् एवं युवा प्रेरक रामदयाल सैन विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने अपने व्याख्यान में शिक्षकों की भूमिका को केवल ज्ञानदाता तक सीमित न मानते हुए परिवर्तन के प्रेरक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक समाज एवं विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने दूरदृष्टि, संवेदनशीलता एवं नैतिकता जैसे नेतृत्व गुणों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ रामदयाल सैन ने छात्र कल्याण को शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन एवं सकारात्मक शैक्षिक वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया तथा प्रश्नोत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरिओम शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ब्रह्मानंद प्रधान ने किया

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