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    माई चाॅइस - माई राइट विषय पर विद्यार्थियों के बीच विचार रखे

    2 months ago

    अखिल भारतीय जनवादी महिला की प्रांतीय कोषाध्यक्ष रईसा ने सोशल सांइस एंड ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट, लॉर्ड्स यूनिवर्सिटी में माई चाॅइस - माई राइट विषय पर विद्यार्थियों के बीच विचार रखे। 

          उन्होने बताया कि हम एक पुरुष प्रधान समाज में रहते हैं। इसमें अधिकांश नौजवानों को

    अपनी पसंद से चुनने का अधिकार नहीं है। शिक्षा, कैरियर, विवाह आदि के बारे में फैसला लेने का हक नहीं है। लडकियों पर यह पाबंदियां ज्यादा होती हैं। लडकियों को प्रायः कैरियर चूज करने का, अपनी पसंद से शादी करने का, अपनी कमाई अपनी इच्छानुसार खर्च करने का अधिकार नहीं होता। 

        हालांकि 2024-25 में राजस्थान में उच्च शिक्षा में लडकियों का एडमिशन बढकर 7.25 लाख हो गया है जबकि लडकों के 5.86 लाख एडमिशन हुए। लेकिन इस बढोतरी का रिफ्लेक्शन जाॅब्स में नहीं दिखाई देता। इसकी एक बड़ी वजह लडकी का अच्छा रिश्ता कर विवाह करना प्राथमिकता में रहना है। यही कारण है कि आज भी राजस्थान में करीब 25% बाल विवाह होते हैं।

           लडकियों को अपनी पसंद से कैरियर चुनने और जाॅब करने की आजादी नहीं दी जाती। कई बार तो उन्हे जाॅब छोड़ने तक को मजबूर किया जाता है। 

         जो नौजवान अपनी पसंद से शादी-विवाह करना चाहते हैं उनको रोका जाता है और शादी कर लेने पर इज्जत (झूठी) के नाम पर हत्या तक कर दी जाती है। 

      कन्या भ्रूण हत्या एक छिपी हुई समस्या है जो लगातार बनी हुई है। कन्या भ्रूण हत्या के केवल तीन मामले दर्ज हुए जबकि असल में यह काफी ज्यादा हैं। घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं सहन करती रहती हैं शिकायत दर्ज नहीं कराती। 

           नौजवान विद्यार्थियों को अपना नागरिक दायित्व निभाते हुए कैरियर के साथ-साथ एक बेहतर समाज निर्माण में भी योगदान देना चाहिए जो ज्यादा समतामूलक तथा समावेशी हो।

     

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