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    मंत्रिमंडल द्वारा दो से अधिक संतान होने पर पंचायत तथा निकाय चुनाव लड़ने पर रोक हटाने का निर्णय के बाद प्रभावित समस्त कर्मचारियों को भी परिलाभ दिया जाएं

    2 months ago

    मंत्रिमंडल द्वारा दो से अधिक संतान होने पर पंचायत तथा निकाय चुनाव लड़ने पर रोक हटाने का निर्णय के बाद प्रभावित समस्त कर्मचारियों को भी परिलाभ दिया जाएं

     

    जून 2002 को या इसके बाद दो से अधिक संतान होने पर प्रमोशन, वित्तीय उन्नयन, सीधी भर्ती की समस्त बाधाएं हटाईं जाए

     

          

    राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 25-02-2026 की बैठक में पंचायतीराज संशोधन बिल 2026 और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दी गई है।

     

         दोनों बिल विधानसभा में पारित होने के बाद कानून बन जाएंगे। इनके तहत अब दो से अधिक संतान वालों के पंचायत - निकाय चुनाव लड़ने पर लगी रोक हट जाएगी।

     

         कर्मचारी नेता विपिन प्रकाश शर्मा का कहना है कि 1 जून 2002 को अथवा इसके बाद दो से अधिक संतान होने पर राज्य कार्मिकों-शिक्षकों-अधिकारियों को पदोन्नति तथा वेतन उन्नयन विलम्ब से दिया जा रहा है और बेरोजगारों अथवा सेवारत कार्मिकों को सीधी भर्ती के लिए अपात्र माना जा रहा है।

     

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने बताया कि एक जून 2002 के बाद तीन संतान होने पर कर्मचारी पर निम्न नियमों के कारण वेतन उन्नयन में विलम्ब होता है...

     

    1- वित्त विभाग के नोटिफिकेशन No. F. 7(1) DOP/A-1/95/Pt. (A-Gr. II) Jaipur, dated: 16.3.2023 की तहत 1 जून 2002 को अथवा इसके बाद दो से अधिक संतान होने पर पदोन्नतियां नियमित की जाने लगी है, लेकिन वार्षिक वेतन वृद्धियों का नोशनल लाभ तथा नकद लाभ 3 साल बाद देने का प्रावधान रख दिया गया है।

     

    2- एक जून 2002 को या इसके बाद दो से अधिक सन्तान होने की तिथि के बाद मिलने वाला ACP/MACP (वित्तीय उन्नयन) तीन वर्ष बाद मिल रहा है। F.14(88) FD/Rules/2008 Jaipur dated 18 DEC 2020

     

    3- ऐसा कोई भी अभ्यर्थी, जिसके 01.06.2002 को या उसके पश्चात् दो से अधिक बच्चे / संतान हो, सेवा में नियुक्ति के लिये पात्र नहीं होता है।

     

         *कर्मचारी नेता विपिन प्रकाश शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है...पंचायत तथा निकाय चुनाव में दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने की बाध्यता हटाने के साथ ही कार्मिक विभाग तथा विधि विभाग एवं संबंधित सभी विभागों द्वारा 1 जून 2002 अथवा इसके बाद दो से अधिक संतान होने पर राज्य में प्रमोशन, वित्तीय उन्नयन तथा बेरोजगारों की नियुक्ति की समस्त बाधाएं समाप्त करने के लिए नियमों में संशोधन एवं आदेश जारी करवाए जाना सामीचीन रहेगा.

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