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    मिज़ोरम सांसद का आरोप: राज्यसभा में रक्षा भूमि घोटाले का मुद्दा उठाने की नहीं मिली अनुमति

    2 hours ago

    नई दिल्ली | 06/02/2026

    मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के राज्यसभा सांसद के. वानलालवेना ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें बीते एक सप्ताह से राज्यसभा में मिज़ोरम के लेंगपुई हवाई अड्डे के पास भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के लिए निजी भूमि अधिग्रहण में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सांसद का दावा है कि इस भूमि अधिग्रहण में लगभग ₹187.90 करोड़ की अनियमितताएं हुई हैं और इससे जुड़े अहम सवालों को सदन में रखने से उन्हें रोका जा रहा है।

    के. वानलालवेना, जो मिज़ोरम से राज्यसभा के एकमात्र सांसद हैं, ने कहा कि बजट सत्र की शुरुआत से ही वे इस मामले को उठाने के लिए लगातार ज़ीरो आवर नोटिस दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनके किसी भी नोटिस को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने इसे न केवल संसदीय प्रक्रियाओं के लिए चिंताजनक बताया, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करने वाला कदम बताया।

    क्या है पूरा मामला

    सांसद के अनुसार, मिज़ोरम के एकमात्र हवाई अड्डे लेंगपुई एयरपोर्ट और उसके पास स्थित सिफ्फिर गांव के आसपास की निजी भूमि को भारतीय वायुसेना के लिए वायु रक्षा प्रणालियों की स्थापना हेतु अधिग्रहित किया गया। आरोप है कि इस भूमि को राज्य सरकार ने अत्यधिक दरों पर खरीदा, जो भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनों और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

    के. वानलालवेना ने दावा किया कि भूमि अधिग्रहण की यह प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों के खिलाफ है।

    कानूनों के उल्लंघन का आरोप

    सांसद ने अपने आरोपों में कहा कि इस अधिग्रहण के दौरान कई अनिवार्य प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया, जिनमें शामिल हैं:

    • स्थानीय समाचार पत्रों में भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचनाओं का प्रकाशन

    • संबंधित ग्राम परिषदों से परामर्श

    • सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन (Social Impact Assessment)

    उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया और यह पूरा मामला संदिग्ध बिचौलियों के माध्यम से धन के ग़लत इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

    केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग

    के. वानलालवेना ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में न केवल राज्य स्तर पर बल्कि केंद्र के धन का भी दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस गंभीर मामले की जांच किसी उपयुक्त केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए।

    उन्होंने कहा,
    “इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। कानून और जनता के विश्वास का इतना बड़ा उल्लंघन करने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।”

    राज्य स्तर पर भी शिकायत दर्ज

    सांसद ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी मिज़ो नेशनल फ्रंट ने मिज़ोरम सरकार के मुख्य सतर्कता अधिकारी (Chief Vigilance Officer) के पास इस मामले को लेकर एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। इसमें केंद्रीय जांच एजेंसियों से विस्तृत जांच की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि एमएनएफ फिलहाल मिज़ोरम में विपक्ष की भूमिका में है।

    सत्ता पक्ष का पलटवार

    वहीं, मिज़ोरम में सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने इन आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने कहा है कि इस पूरे मामले में पूर्ववर्ती एमएनएफ और कांग्रेस सरकारों के मंत्रियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    ZPM नेताओं का कहना है कि यदि सीबीआई जांच होती है, तो भारतीय वायुसेना से जुड़े भूमि हस्तांतरण के मामले में “वास्तविक तथ्य” सामने आ जाएंगे। पार्टी ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार ने भूमि हस्तांतरण के दौरान पूरी सावधानी और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।

    सरकार का पक्ष

    ZPM ने 31 जनवरी को आइज़ोल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारतीय वायुसेना को भूमि सौंपने के लिए “कानूनी रूप से मजबूत और सावधानीपूर्वक प्रक्रिया” अपनाई गई। पार्टी का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी कदम प्रचलित कानूनों के अनुरूप थे और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं की गई।

    संसद में मुद्दा न उठने पर सवाल

    के. वानलालवेना द्वारा बार-बार यह मुद्दा उठाने की कोशिश और इसके बावजूद राज्यसभा में चर्चा की अनुमति न मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं, तो सरकार को खुली बहस से क्यों डरना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला केवल एक कथित भूमि घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संसद में विपक्ष की आवाज़ और लोकतांत्रिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। ज़ीरो आवर के दौरान किसी सांसद को मुद्दा उठाने से रोकना असाधारण स्थिति मानी जाती है, खासकर तब जब मामला सार्वजनिक धन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।

    आगे क्या?

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्र सरकार इस मामले में किसी केंद्रीय एजेंसी से जांच के आदेश देती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि राज्यसभा में के. वानलालवेना को अपने आरोपों को औपचारिक रूप से रखने का अवसर मिलता है या नहीं।

     

    फिलहाल, मिज़ोरम की राजनीति में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

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