Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    सोना-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला सहारा लेकिन अस्थिरता बरकरार

    2 hours ago

    Yugcharan / 08/02/2026

    अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में बीते कुछ दिनों से सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद अचानक आई तेज गिरावट और फिर आंशिक रिकवरी ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों को सतर्क कर दिया है। वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक हालात के चलते कीमती धातुओं में अस्थिरता बनी हुई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमतों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड एक प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ ऊपर बंद हुआ, जिससे पिछले सत्रों की गिरावट के बाद कुछ राहत मिली। हालांकि, चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कहीं अधिक तीव्र रहा। एक समय 10 से 15 प्रतिशत तक फिसलने के बाद चांदी ने आंशिक रिकवरी दर्ज की, लेकिन साप्ताहिक आधार पर इसमें अब भी कमजोरी बनी हुई है।

    घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी यही रुझान देखने को मिला। सोने और चांदी के वायदा कारोबार में तेज गिरावट के बाद कुछ सत्रों में कीमतें संभलती नजर आईं। बाजार सहभागियों के अनुसार, अचानक बढ़ी अस्थिरता को देखते हुए एक्सचेंज ने मार्जिन आवश्यकताओं में बढ़ोतरी की है, जिससे सट्टेबाजी पर कुछ हद तक अंकुश लगे और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली का नतीजा है। बीते एक साल में सोना और चांदी दोनों ने असाधारण तेजी दिखाई थी। जनवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब पहुंच गया था, जबकि चांदी ने भी कई वर्षों का उच्च स्तर छू लिया था। इतनी तेज बढ़त के बाद निवेशकों द्वारा लाभ सुरक्षित करने की प्रवृत्ति स्वाभाविक मानी जा रही है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रही है। डॉलर में तेजी आने से डॉलर में मूल्यांकित सोना और चांदी अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भावी ब्याज दर नीति को लेकर भी बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी रहने की आशंका से गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों, जैसे सोना और चांदी, पर दबाव देखा जा रहा है।

    भू-राजनीतिक मोर्चे पर हालांकि अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया से लेकर अन्य क्षेत्रों में जारी तनाव और कूटनीतिक बातचीत की खबरें बाजार की दिशा को प्रभावित कर रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव में कमी आती है, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग अस्थायी रूप से कमजोर पड़ सकती है। वहीं, किसी भी नए तनाव या अनिश्चितता की स्थिति में निवेशक एक बार फिर सोने-चांदी की ओर रुख कर सकते हैं।

    घरेलू सर्राफा बाजार में भी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के दामों में एक ही दिन में हजारों रुपये का अंतर आया। व्यापारियों के अनुसार, ऊंचे स्तरों पर मांग कुछ कमजोर हुई है, लेकिन गिरावट के दौरान खरीदारी का रुझान भी दिखाई दे रहा है। खासकर आभूषण कारोबार से जुड़े लोग कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा दौर को पूर्ण गिरावट के बजाय ‘कंसॉलिडेशन फेज’ के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, दीर्घकालिक आधार पर सोने के पक्ष में कई संरचनात्मक कारक अभी भी मजबूत हैं। इनमें वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद, बढ़ता सरकारी कर्ज, मुद्रा अवमूल्यन की चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को लेकर बढ़ती अनिश्चितता शामिल हैं।

    भारत के संदर्भ में देखें तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सहित कई केंद्रीय बैंक बीते कुछ वर्षों से अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं। भारत के पास दुनिया के प्रमुख स्वर्ण भंडारों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘डी-डॉलराइजेशन’ की वैश्विक प्रवृत्ति के चलते भी सोने की मांग को दीर्घकाल में समर्थन मिल सकता है।

    चांदी के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। चांदी न केवल एक कीमती धातु है, बल्कि औद्योगिक उपयोग भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में मांग बढ़ने की संभावनाओं के बावजूद, अल्पकाल में इसमें उतार-चढ़ाव अधिक रहने की आशंका जताई जा रही है। तेज रैलियों के बाद चांदी में करेक्शन आम बात मानी जाती है।

    निवेशकों को लेकर विशेषज्ञों की राय फिलहाल सतर्क रहने की है। अत्यधिक अस्थिरता के चलते अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिम भरी हो सकती है। दीर्घकालिक निवेशक कीमतों में गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से निवेश पर विचार कर सकते हैं, लेकिन बिना जोखिम प्रबंधन के बड़े दांव लगाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

     

    कुल मिलाकर, सोना और चांदी दोनों ही इस समय वैश्विक घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। हालिया रिकवरी के बावजूद बाजार में स्थिरता के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों के संकेत और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए संयम और सतर्कता ही सबसे बड़ी रणनीति मानी जा रही है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत डीडीजीएस आयात पर सीमित शुल्क रियायत, केवल 5 लाख टन को मंजूरी
    Next Article
    दिल्ली मौसम ताज़ा अपडेट: दिन में खिली धूप, सुबह-शाम ठंड बरकरार, राजधानी में मौसम का संक्रमणकाल जारी

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment