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    नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण: हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से अभिभावकों में चिंता, छात्रों की सुरक्षा और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल — संयुक्त अभिभावक संघ

    1 month ago

    जयपुर। शहर के प्रतिष्ठित स्कूल नीरजा मोदी स्कूल से जुड़े प्रकरण में हाईकोर्ट द्वारा सीबीएसई के आदेश पर लगाई गई रोक को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि यह मामला केवल मान्यता का नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य, सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

     

    संघ ने स्पष्ट कहा कि सीबीएसई द्वारा स्कूल की मान्यता वापस लेने का निर्णय गंभीर अनियमितताओं और खामियों के आधार पर लिया गया था। ऐसे में उस निर्णय पर रोक लगने से अभिभावकों के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।

     

    संयुक्त अभिभावक संघ ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए तथा जब तक सभी खामियां पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक विद्यार्थियों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाए।

    संघ ने विशेष रूप से छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पूर्व में हुई घटनाओं ने अभिभावकों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे में केवल प्रशासनिक आदेशों से नहीं, बल्कि ठोस सुधारात्मक कदमों से ही विश्वास बहाल किया जा सकता है।

     

     

    *संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—* “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन गंभीर खामियों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, उसी पर अब रोक लग रही है। क्या विद्यार्थियों की सुरक्षा और भविष्य से बढ़कर कोई और प्राथमिकता हो सकती है? यदि किसी संस्थान में व्यवस्थागत कमियां पाई जाती हैं, तो उसे सुधारना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि राहत दिलाकर मामले को टालना।”

     

    *उन्होंने आगे कहा—* “हम साफ शब्दों में कहना चाहते हैं कि संयुक्त अभिभावक संघ किसी भी प्रकार की लापरवाही या समझौते को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया, तो प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।”

     

    संघ ने राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और सीबीएसई से मांग की है कि इस प्रकरण में स्पष्ट और ठोस रुख अपनाया जाए तथा अभिभावकों को पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी दी जाए।

     

    *कम नामांकन के नाम पर स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार — अरविंद अग्रवाल*

     

    इन दिनों प्रदेश में कम नामांकन वाले लगभग 7 हजार स्कूलों को मर्ज करने की खबरें चल रही है जिस पर संयुक्त अभिभावक संघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। संघ का मानना है कि यह कदम शिक्षा के अधिकार को कमजोर करने वाला और ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। संघ के अनुसार, कम नामांकन की समस्या का समाधान स्कूलों को बंद या मर्ज करना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, पर्याप्त शिक्षक नियुक्ति, आधारभूत सुविधाओं का विकास और अभिभावकों का विश्वास बहाल करना होना चाहिए। यदि सरकार स्कूलों को मर्ज करने का निर्णय लेती है, तो इससे हजारों बच्चों को दूर-दराज के स्कूलों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे विशेषकर छोटे बच्चों और बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होगी।

     

    *संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा—* "सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए स्कूलों को मर्ज करने जैसा गलत निर्णय लेने जा रही है। यह सीधे-सीधे गरीब और ग्रामीण वर्ग के बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीनने की साजिश है। यदि स्कूलों में नामांकन कम है तो इसके लिए सरकार की नीतियां और शिक्षा विभाग की लापरवाही जिम्मेदार है, न कि बच्चे या अभिभावक।"

     

    *उन्होंने आगे कहा—* "स्कूल बंद करना या मर्ज करना समाधान नहीं है। सरकार पहले यह बताए कि कितने स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, कितने स्कूल बिना मूलभूत सुविधाओं के चल रहे हैं। जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक इस प्रकार के फैसले पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं।"

     

    *संघ ने मांग की है कि—*

    * किसी भी स्कूल को मर्ज या बंद करने से पहले स्थानीय अभिभावकों और समुदाय से राय ली जाए।

     

    * सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

     

    * नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

     

    * ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को कमजोर करने वाले किसी भी निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए।

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