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    संस्कृत और कोडिंग का संगम: केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की तकनीकी पहल में संस्कृत छात्र बनेंगे नए युग के कोडर्स संगणकीय प्रतिभा खोज–2025’ का दूसरा चरण सम्पन्न

    2 months ago

    जयपुर।
    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर में  ‘संगणकीय प्रतिभा खोज–2025’ (Computer Talent Hunt 2025) का दूसरा चरण सम्पन्न हुआ। संस्कृत विद्यार्थियो को कोडिंग, प्रोग्रामिंग और वेब तकनीक से जोड़ने की विश्वविद्यालय की यह पहल जयपुर परिसर में उल्लेखनीय उत्साह के साथ सम्पन्न हुई, जिससे यह सिद्ध होता है कि संस्कृत छात्र आधुनिक डिजिटल कौशल में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    द्वितीय चरण पूर्णतः प्रायोगिक था। विश्वविद्यालय मुख्यालय ने Python और PHP पर आधारित 20 प्रश्न सभी परिसरों को भेजे थे, जिनमें से प्रतिभागियों को किसी एक प्रश्न का संपूर्ण कोड डेढ़ घंटे की समय-सीमा में तैयार करना था। परीक्षा संरचना का उद्देश्य विद्यार्थियों की वास्तविक प्रोग्रामिंग क्षमता का मूल्यांकन करना था। इस संदर्भ में विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर मदन मोहन झा ने कहा कि “संगणकीय प्रतिभा खोज–2025 का दूसरा चरण विद्यार्थियों की व्यावहारिक प्रोग्रामिंग दक्षता की वास्तविक परीक्षा है, जो उन्हें तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करेगा। प्रदर्शन के आधार पर विश्वविद्यालय स्तर पर शीर्ष 10 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसके बाद अखिल भारतीय स्तर पर अंतिम विजेताओं की घोषणा की जाएगी। यह प्रक्रिया संस्कृत विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचार और डिजिटल नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने वाला सशक्त कदम मानी जा रही है।

    विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य श्रीनिवास वरखेड़ी ने इस पहल को संस्कृत शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में ऐतिहासिक महत्व का निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य संस्कृत विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक तकनीक में भी दक्ष बनाना है, ताकि वे भविष्य में तकनीकी नेतृत्व की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। जयपुर परिसर में इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन संगणक विभाग की प्राध्यापिकाओं डॉ. नमिता मित्तल एवं डॉ. शैली प्रकाश के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में सांवरमल यादव और  कार्तिक ने सहयोग किया। संस्कृत शिक्षा और आधुनिक तकनीक का यह संगम सिद्ध करता है कि दोनों का संयोजन अब व्यवहारिक रूप में विद्यार्थियों को नई दिशा, नया कौशल और व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है, जो भविष्य में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में सहायक सिद्ध होंगा

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