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    संस्कृत शिक्षा के ‘लौह पुरुष प्रो वाई एस रमेश हुये विंटेज कार से विदा

    6 months ago

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर वाई. एस. रमेश का छात्रों किया भव्य अभिनंदन दिए विभिन्न उपहार

    जयपुर,। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक प्रोफेसर वाई. एस. रमेश की 38 वर्षों की गौरवपूर्ण राजकीय सेवा पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उनके पूर्व छात्रों द्वारा एक भावपूर्ण अभिनंदन एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। श्रद्धा से ओतप्रोत विदाई समारोह अपने प्रिय गुरु को विदा देने उमड़े पूर्व छात्र कार्यक्रम का आयोजन जयपुर परिसर में हुआ, जहाँ छात्रो ने पुष्पवर्षा से प्रो. रमेश का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती राधा रमेश के साथ ‘अशोक वृक्ष’ का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा सेवा बस्ती के बच्चों को अध्ययन सामग्री वितरित की। समारोह में ‘ गीरवानी संस्कृत अभिनन्दन ग्रन्थ’ का विमोचन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने प्रिय गुरु को 21 किलो की पुष्पमाला, चाँदी की राधा कृष्ण की प्रतिमा सहित अनेक उपहार भेंट किए और उन्हें विंटेज कार में भावभीनी विदाई दी यह दृश्य उपस्थित सभी के लिए अविस्मरणीय रहा। पूर्व छात्रों ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद युवनिधि कोष हेतु 51 हजार रुपये का योगदान भी प्रदान किया। इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर. जी. मुरलीकृष्ण ने संबोधित करते हुए कहा कि “प्रो. वाई. एस. रमेश न केवल संस्कृत शिक्षा के आलोक पुरुष हैं, बल्कि उन्हें संस्कृत का ‘लौह पुरुष’ कहा जा सकता है, जिन्होंने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निष्ठा से विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। समारोह में पूर्व निदेशक संस्कृत शिक्षा प्रो. सुरेन्द्र शर्मा,प्रो अर्कनाथ चौधरी प्रो सुदेश शर्मा प्रो भगवती सुदेशविशेषाधिकारी कुलपति प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, जयपुर परिसर के नवनियुक्त निदेशक प्रो. रमाकांत पाण्डेय, प्रो. कुलदीप शर्मा, प्रो. रत्न मोहन झा, संस्कृत शिक्षा आयुक्त श्रीमती प्रियंका जोधावत डॉ राजकुमार जोशी डॉ राघव प्रकाश सहित अनेक विद्वान, अधिकारी, विद्यार्थी एवं उपस्थित रहे।

    वक्ताओं ने प्रो. रमेश की चार दशकों से अधिक की निष्ठावान सेवा, संस्कृत साधना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें “संस्कृत शिक्षा के आलोक पुरुष” की संज्ञा दी।

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