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    स्त्रियों के लिए खादी एक कपड़ा नहीं, जीवन जीने का तरीका था: प्रो. संगीत शर्मा

    2 months ago

    जयपुर। आजादी के आंदोलन के दौर में खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं बल्कि स्त्रियों

    के लिए यह जीवन जीने का एक तरीका था। यह उनके लिए रोजमर्रा का एक कठोर संघर्ष था। पुरुषों के लिए खादी पहनने का अनुभव अलग था जबकि महिलाओं के लिए यह एक पीड़ा भरा अनुभव होता था। खादी पहनने का राजनीतिक आयाम स्त्री और पुरुष दोनों के लिए लगभग समान था लेकिन सामाजिक तौर पर स्त्रियों के लिए यह ज्यादा कठोर और संघर्षशील अनुभव था। उपरोक्त बातें राजस्थान विश्वविद्यालय की इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. संगीता शर्मा ने कहीं। वे हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित साप्ताहिक व्याख्यान शृंखला में मुख्य वक्ता के बतौर विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थीं।

    व्याख्यान का विषय “आजादी के लिए महिलाओं का संघर्ष: राजपूताना रियासत के स्वर” था।

    इस अवसर पर प्रो. संगीत शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी जी राजपूताना रियासत कभी नहीं आए, लेकिन गाँधीवादी उसूलों से प्रेरित कई रचनात्मक कार्यक्रम उस समय के राजपूताना रियासत में चल रहे थे। महिला शिक्षा, खादी, स्वदेशी आंदोलन, किसान आंदोलन जैसे कई सामाजिक राजनीतिक आंदोलन यहाँ सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ राजस्थान की स्त्रियाँ अगर झण्डा बुलंद कर रही थीं तो यह एक साहसिक कार्यवाही थी।

    क्यूंकि दूसरे प्रांतों की तुलना में राजपूताना रियासत में स्त्रियों की स्थितियाँ ज्यादा कठोर हुआ करती थी। उन्होंने आगे बताया कि ब्रिटिश भारत में अधिकतर रियासतों में तीन स्तर की सत्ता प्रणालियाँ काम कर रही थीं। एक जागीरदारी, दूसरा देसी नरेश और तीसरा ब्रिटिश शासन। देसी रियासतों के अधीन आने वाले इलाकों में समाज सुधार के आंदोलन नहीं हो पाए थे। इसलिए भी महिलाओं की सामाजिक स्थिति यहाँ ज्यादा खराब थी। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार संकाय की अध्यक्ष डॉ. ऋचा यादव ने किया। उन्होंने मुख्य वक्ता प्रो. संगीता शर्मा का स्वागत करते हुए बताया कि इतिहास में महिलाओं के योगदान का रेखांकन अक्सर कम देखने को मिलता है। प्रो. संगीत शर्मा ने इतिहास में स्त्रियों की भूमिका पर गहन शोध कार्य किया है और उन्होंने राजपूताना रियासत में आधी आबादी के योगदान के अध्ययन का श्रमशील कार्य किया है।

     

    धन्यवाद ज्ञापन अकादमिक और प्रशासनिक समन्वयक डॉ. रतन सिंह शेखावत ने किया। उन्होंने कहा कि प्रो. संगीत शर्मा ने स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी की जो पड़ताल की है, वह निश्चय ही पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए इतिहास को एक नए दृष्टि से देखने में मदद करेगा। कार्यक्रम के अंत में प्रो. संगीत शर्मा ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक मौजूद रहे।

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