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    दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं प्रारंभ है- स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती

    1 month ago

    डिग्रियां मिलीं, खिले चेहरों की मुस्कान— अपेक्स यूनिवर्सिटी का चतुर्थ दीक्षांत समारोह बना यादगार अवसर

    जयपुर। अपेक्स यूनिवर्सिटी में शनिवार को चतुर्थ दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह के विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के महासचिव पूज्य स्वामी जितेन्द्रानन्द जी सरस्वती एवं एक्म्स ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक संदीप जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व आईपीएस अधिकारी, अखिल भारतीय विशेष संपर्क प्रमुख (भारतीय शिक्षण मंडल) एवं निदेशक आरएफआरएफ नागपुर शिवव्रत महापात्र भी उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. रवि जूनीवाल ने की।

    अचरोल स्थित अपेक्स यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित इस दीक्षांत समारोह की शुरुआत दीक्षांत परेड से हुई, जो प्रशासनिक भवन से प्रारंभ होकर समारोह स्थल तक पहुँची। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत और अपेक्स यूनिवर्सिटी के कुलगीत के साथ किया गया। विश्वविद्यालय ने अपने स्नातकों को भारतीय वेशभूषा में सुसज्जित कर दीक्षांत समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।

    समारोह के दौरान विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए तथा सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के लिए मेघा कोठारी को डॉ. सागरमल जूनीवाल मेमोरियल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्नातक के 998, स्नातकोत्तर के 286 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि विभिन्न विषयों में शोध कार्य पूर्ण करने वाले 53 शोधार्थियों को पीएच.डी. की डिग्री प्रदान की गई।

    दीक्षांत समारोह के दौरान गंगा संरक्षण, सनातन संस्कृति के संरक्षण, तथा धार्मिक-सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्वामी जितेन्द्रानन्द जी सरस्वती तथा फार्मास्युटिकल उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए संदीप जैन को विश्वविद्यालय की ओर से डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

     अपने संबोधन में स्वामी जितेन्द्रानन्द जी सरस्वती ने कहा कि आज से उनके जीवन की नई शुरुआत होगी। युवाओ को भारत के नए उभरते अर्थतंत्र का भाग बनाना होगा। युवाओ को नेतृत्व करना है और आगे बढ़ कर कार्य करना है। नौकरी की तलाश में ना रहें बल्कि रोजगार उपलब्ध कराये। एआई के बारे मे बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह दो धारी तलवार है जिसका सदुपयोग होना चाहिये। सफल व्यवसायी और मानवतावादी सामाजिक कार्यकर्ता संदीप जैन ने कहा कि हमने समाज और देश से जो लिया है उसे लौटाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वैमनस्य का कचरा साफ़ करके समाज की सुन्दर मूर्ति का निर्माण किया जा सकता है। हमारा प्रयास होना चाहिये कि सब स्वस्थ हों और सबका जीवन सुखी हो।

    शिवव्रत महापात्र ने कहा कि सभी युवाओं को भारत बोध का हिस्सा बनना चाहिये। ये बोध भारतीयों को भारतीयों से जोड़ता है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने के लिए नहीं होती बल्कि इसे आपको भारत को जानने और इसकी सेवा करने के लिए उपयोग में लेना चाहिये। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. रवि जूनीवाल ने अपने दीक्षांत संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करना जीवन की नई यात्रा की शुरुआत है और अब विद्यार्थियों के सामने नए अवसरों के साथ नई जिम्मेदारियां भी हैं।

    कार्यक्रम में संजय शिक्षा समिति के सचिव मनोज जुनीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सोमदेव शतांशु ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा रजिस्ट्रार डॉ. पंकज कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, एकेडमिक काउंसिल के सदस्य तथा शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का गौरवपूर्ण और यादगार अवसर बना।

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