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    धौलपुर की बेटी का राजस्थान में डंका: किसान की पुत्री नीरज कुमारी बनीं RPSC असिस्टेंट प्रोफेसर, हासिल की 63वीं रैंक

    1 month ago

    धौलपुर। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और न ही संसाधनों की कमी कभी सफलता का मार्ग रोक सकती है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा घोषित सहायक आचार्य (वनस्पति शास्त्र/Botany) परीक्षा के परिणामों में धौलपुर जिले के बाड़ी उपखंड के एक छोटे से गाँव संडपुरा (निधारा) की बेटी नीरज कुमारी ने यह चरितार्थ कर दिखाया है। साधारण किसान परिवार में जन्मी नीरज ने पूरे राजस्थान में 63वीं रैंक प्राप्त कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम लहराया है।

    साधारण परिवेश, असाधारण संकल्प

    नीरज कुमारी की यह सफलता इसलिए विशेष है क्योंकि वे पूरी तरह से ग्रामीण और कृषि आधारित पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके पिता रामवीर सिंह गुर्जर एक साधारण किसान हैं और माता शिवदेवी गृहिणी हैं। गाँव की पगडंडियों से निकलकर राजस्थान विश्वविद्यालय और फिर RPSC की मेरिट लिस्ट तक का सफर नीरज के कड़े परिश्रम, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास की कहानी कहता है।

    बचपन से ही मेधावी: सफलताओं का सफर

    नीरज कुमारी का शैक्षणिक करियर शुरू से ही उपलब्धियों से भरा रहा है। उनकी मेहनत का अंदाजा उनके पिछले कुछ वर्षों के परिणामों से लगाया जा सकता है:

     * 12वीं कक्षा (2018): विज्ञान वर्ग में जिला स्तर पर 90.80% अंक प्राप्त किए और एमवीसी वर्ग में प्रथम स्थान पाकर प्रतिष्ठित पद्माक्षी अवार्ड जीता।

     * पीजी प्रवेश परीक्षा (2021): राजस्थान विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर (PG) प्रवेश परीक्षा में सामान्य वर्ग में 9वां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

     * CSIR NET JRF (2025): हाल ही में जुलाई 2025 में आयोजित देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली शोध पात्रता परीक्षा में ऑल इंडिया 85वीं रैंक हासिल की।

    पहले ही प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता

    नीरज के बड़े भाई के अनुसार, नीरज ने बिना किसी भटकाव के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सहायक आचार्य जैसे उच्च पद पर सफलता प्राप्त की है। ग्रामीण परिवेश में जहाँ बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है, वहाँ नीरज ने स्वयं को साबित कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

    गाँव संडपुरा में उत्सव जैसा माहौल

    जैसे ही सहायक आचार्य परीक्षा के अंतिम परिणाम घोषित हुए और नीरज का नाम मेरिट सूची में चमका, वैसे ही बाड़ी उपखंड और संडपुरा (निधारा) गाँव में जश्न शुरू हो गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुँह मीठा कराया और ढोल-नगाड़ों के साथ खुशियाँ मनाईं। ग्रामीणों का कहना है कि नीरज ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे धौलपुर जिले का गौरव बढ़ाया है।

    बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

    इस बड़ी उपलब्धि पर क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने हर्ष व्यक्त किया है। जेईएन सवाई सिंह गुर्जर ने कहा कि नीरज की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि कभी बाधा नहीं बनती। उनकी यह जीत आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए शिक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास का नया संचार करेगी।

    सफलता का संदेश

    नीरज कुमारी की यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए एक संदेश है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं। नीरज ने दिखाया है कि मेहनत और लगन के दम पर सफलता के सबसे ऊंचे पायदान तक पहुँचा जा सकता है। अब वे सहायक आचार्य के रूप में वनस्पति शास्त्र के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ देंगी और उच्च शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

     

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