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    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का कहर, घना कोहरा और जमी झीलों ने बढ़ाई मुश्किलें

    3 days ago

    उत्तर भारत इस समय भीषण ठंड की चपेट में है। घने कोहरे, बर्फीली हवाओं और गिरते तापमान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है, जिससे सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह ठंडा दौर पिछले चार दिनों से जारी है और इसके कुछ और समय तक बने रहने की संभावना है।

    दिल्ली में सर्दी का सबसे ठंडा दिन

    गुरुवार को दिल्ली ने इस सर्दी का अब तक का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया। न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे सुबह के समय सड़कों पर घना कोहरा छाया रहा। दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सुबह के समय वाहन लाइट्स के सहारे चलते नजर आए।

    पड़ोसी राज्यों में भी हालात गंभीर

    दिल्ली से सटे हरियाणा के कुछ इलाकों में तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे दर्ज किया गया। सोशल मीडिया पर बर्फ की परत से ढकी गाड़ियों और मोटरसाइकिलों की तस्वीरें सामने आईं, जो ठंड की गंभीरता को दर्शाती हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में भी कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।

    कश्मीर में जमी झीलें और जमे पाइप

    कश्मीर घाटी में ठंड का असर और भी अधिक देखने को मिल रहा है। श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील आंशिक रूप से जम गई है। कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइन में पानी जमने से सप्लाई बाधित हुई है। कुछ इलाकों में झरने तक जम गए हैं, जिससे यह क्षेत्र पूरी तरह शीत लहर की गिरफ्त में आ गया है।

    यातायात सेवाओं पर असर

    घने कोहरे का सीधा असर हवाई और रेल यातायात पर पड़ा है। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को उड़ानों में देरी की चेतावनी जारी की है। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल रही हैं, जबकि कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से रद्द भी किया गया है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की लंबी कतारें देखी गईं।

    स्कूल और दैनिक गतिविधियां प्रभावित

    कई राज्यों में ठंड और कोहरे को देखते हुए स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है या उनके समय में बदलाव किया गया है। सुबह के समय बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलने में काफी कठिनाई हो रही है। खुले में काम करने वाले मजदूरों और सड़क किनारे रहने वाले लोगों पर ठंड का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

    बेघर लोगों की बढ़ी चिंता

    दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में बेघर लोग ठंड से बचने के लिए अलाव जलाकर रात गुजारते नजर आए। प्रशासन द्वारा रैन बसेरे और कंबल वितरण की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन बढ़ती ठंड के कारण यह प्रयास कई जगह अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।

    ठंड के साथ बढ़ा प्रदूषण

    इस ठंड के दौर में वायु गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर दर्ज किया गया है। सर्दियों में कम तापमान के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में नीचे ही फंसे रहते हैं, जिससे दृश्यता कम होती है और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग की चेतावनी

    मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो उसे शीत लहर की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान हालात इसी श्रेणी में आते हैं। विभाग ने लोगों को सुबह और देर रात अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, गर्म कपड़े पहनने और कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय सतर्क रहने की सलाह दी है।

    आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले एक-दो दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के बाद तापमान में धीरे-धीरे मामूली बढ़ोतरी हो सकती है।

    जनजीवन पर व्यापक असर

    कुल मिलाकर, उत्तर भारत में जारी यह कड़ाके की ठंड केवल मौसम की खबर नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़ा एक गंभीर विषय बन गई है। परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन के हर पहलू पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहकर इस चुनौती का सामना करना होगा।

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