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    वरिष्ठ नागरिकों की ऊर्जा और उत्साह से गूंजा जवाहर कला केंद्र

    2 months ago

    फूड एंड न्यूट्री फेस्ट में ‘सुपर 60’ समूह की रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समा, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा शिल्पग्राम परिसर
    जयपुर।
    जवाहर कला केंद्र का शिल्पग्राम रविवार को उस समय उल्लास और उमंग से भर उठा, जब फूड एंड न्यूट्री फेस्ट के मंच पर ‘सुपर 60’ समूह के वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य, गीत और लयबद्ध प्रस्तुतियों ने ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक भी झूम उठे। यह कार्यक्रम इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि उम्र केवल एक संख्या है, उत्साह और ऊर्जा कभी कम नहीं होती।
    नृत्य और गीतों से सजी यादों की शाम
    कार्यक्रम की शुरुआत उत्साहपूर्ण संगीत और पारंपरिक लोकनृत्य से हुई। मंच पर जब वरिष्ठ प्रतिभागियों ने राजस्थानी गीतों की धुन पर कदम मिलाए, तो पूरा वातावरण जीवंत हो उठा। कुछ प्रतिभागियों ने पुराने हिंदी फिल्मों के गीतों पर नृत्य किया, वहीं कुछ ने कविताएं और हास्य गीत प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
    कार्यक्रम में विभिन्न नृत्य रूपों का संगम देखने को मिला—कहीं पारंपरिक घूमर की झलक थी तो कहीं आधुनिक बीट्स पर थिरकते कदमों ने युवाओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया।
    साठ की उम्र में सजीवता का जश्न
    ‘सुपर 60’ समूह के सदस्य इस कार्यक्रम के केंद्र में रहे। इस समूह में 60 वर्ष से अधिक उम्र के वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने अपनी उम्र के इस पड़ाव को ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर दिया है।
    इन प्रतिभागियों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि जीवन का हर चरण आनंदमय हो सकता है, बस दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। किसी ने मंच पर अपने बचपन की यादें गीतों के माध्यम से ताज़ा कीं, तो किसी ने नृत्य से यह जताया कि सच्ची खुशी साझा करने में है।
    ‘सुपर 60’ के जज़्बे को सलाम
    दर्शकों ने बार-बार तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाया। हर प्रस्तुति के साथ बढ़ता उत्साह यह दर्शा रहा था कि यह मंच केवल कला का नहीं, जीवन के उत्सव का प्रतीक बन चुका है।
    कई दर्शक भावुक हो उठे जब मंच पर कुछ प्रतिभागियों ने अपनी जीवन यात्रा और संघर्षों को गीतों में पिरोकर सुनाया। उनकी कहानियों में जहां अनुभव की गहराई थी, वहीं वर्तमान को जीने का जज्बा भी झलकता था।
    फूड एंड न्यूट्री फेस्ट में स्वस्थ जीवन का संदेश
    कार्यक्रम फूड एंड न्यूट्री फेस्ट का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली और पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि सेहत केवल आहार से नहीं, बल्कि मन की प्रसन्नता और सक्रियता से भी जुड़ी होती है।
    वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी प्रस्तुतियों से ‘हेल्दी माइंड इन हेल्दी बॉडी’ की अवधारणा को साकार रूप दिया। मंच पर उनकी जीवंतता यह कह रही थी कि सकारात्मक सोच ही वास्तविक पोषण है।
    पुरस्कार और सम्मान से हुआ समापन
    कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने सभी को स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र प्रदान कर उनकी रचनात्मकता और ऊर्जा को सलाम किया।
    इस अवसर पर लायन विकास कुमार ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को सम्मानित किया और कहा कि “ऐसे आयोजन न केवल प्रेरणादायक हैं बल्कि समाज को यह सिखाते हैं कि जीवन का हर चरण उत्सव बन सकता है।”
    उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सुपर 60 जैसे समूहों को और मंच प्रदान किए जाएंगे, ताकि वरिष्ठ नागरिक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें और समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
    समाज के लिए प्रेरक पहल
    यह सांस्कृतिक संध्या केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज को प्रेरित करने वाली एक मिसाल बन गई। वृद्धावस्था को अक्सर विश्राम का समय माना जाता है, लेकिन ‘सुपर 60’ समूह ने साबित कर दिया कि यह समय आत्म-अभिव्यक्ति और अनुभव बांटने का भी है।
    कार्यक्रम ने युवाओं को भी यह सिखाया कि ऊर्जा और जोश उम्र के नहीं, सोच के मोहताज होते हैं। दर्शकों ने कहा कि यह आयोजन हर आयु वर्ग के लिए सीख है—“जब मन जवान हो तो शरीर खुद उसका साथ देने लगता है।”
    खुशियों और सेहत का संगम
    फूड एंड न्यूट्री फेस्ट ने इस बार कला, संस्कृति और सेहत के संगम को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया। जहां विभिन्न स्टॉल्स पर पौष्टिक आहार और प्राकृतिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगी थी, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उसमें मानवीय संवेदना और उत्साह का रंग भर दिया।
    सुपर 60 की प्रस्तुतियों ने इस फेस्ट को भावनात्मक ऊँचाई दी, जहां सेहत के साथ जीवन के आनंद का भी संदेश मिला।
    एक ऐसा दिन, जो यादों में बस गया
    दिन भर चले इस आयोजन ने यह साबित किया कि जवाहर कला केंद्र केवल कला का स्थल नहीं, बल्कि जीवन की विविधता का उत्सव है। मंच पर थिरकते वरिष्ठ कलाकारों की मुस्कान, दर्शकों की तालियां और चारों ओर गूंजती संगीत की लय—सबने मिलकर यह अनुभव कराया कि खुशी साझा करने से बढ़ती है।
    कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और दर्शकों ने एक साथ नृत्य करते हुए “ज़िंदगी को मुस्कान के साथ जीने” का संदेश दिया।
    ‘सुपर 60’ समूह का यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन गया। इसने यह याद दिलाया कि जीवन का असली आनंद उम्र में नहीं, आत्मा की तरंगों में बसता है। जब मन में उत्साह और दिल में संगीत हो, तो हर दिन एक नया त्योहार बन जाता है।

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