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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार के माध्यम से उद्यमिता’ विषय पर सेमिनार आयोजित

    1 month ago

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में आज “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार के माध्यम से उद्यमिता” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा किया गया |

     

    यह सेमिनार कृषि विभाग के अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. यादव के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 

    वक्ता हिमांशु यादव ने अपने प्रभावी संचालन, उत्साह और उत्कृष्ट समन्वय कौशल के साथ पूरे सत्र का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में उद्यमिता के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की तथा आईपीआर एवं स्टार्टअप इनोवेशन की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।

    सत्र के दौरान छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करने हेतु एक इंटरैक्टिव चर्चा आयोजित की गई, जिसमें युवाओं को स्टार्टअप एवं नवाचार की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए गए।

    डॉ. रश्मि जैन, प्रेसिडेंट महोदया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज वैश्विक उद्योगों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। उन्होंने छात्रों को एआई आधारित नवाचारों और स्टार्टअप विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा जो तकनीक को समझकर रचनात्मकता के साथ उसका उपयोग करेंगे।

     

    डॉ. अंकित गांधी, प्रो-प्रेसिडेंट ने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी नवीन विचार की सुरक्षा आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को अपने नवाचारों का संरक्षण करने और उन्हें उद्यमिता के माध्यम से समाजोन्मुख योगदान में बदलने का आह्वान किया।

     

    डॉ. अंशु सुराना, प्रो चेयरपर्सन ने अपने संदेश में  कहा कि नवाचार और शोध तभी सार्थक बनते हैं जब उनका उपयोग सही दिशा में किया जाए। उन्होंने एआई और आईपीआर को रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और शोध विस्तार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

     

    सेमिनार का सफलतापूर्वक समापन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन  कॉन्सिल के संयोजक डॉ. सागर कुमार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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