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    यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी, जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (GCIRESF–2025) का सफल आयोजन

    1 month ago

    यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “नवाचार, अनुसंधान और शिक्षा पर आधारित सतत भविष्य के निर्माण हेतु विश्व स्तर पर होने वाला सहयोग और विचारों का संगम” (GCIRESF–2025) का शोध विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों से आए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।

     

    कार्यक्रम का मंच संचालन चारु दुबे, सहायक आचार्य, बेसिक एंड एप्लाइड साइंस द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

     

    प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने विश्वविद्यालय का परिचय देते हुए सम्मेलन के उद्देश्य और महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थायी भविष्य के निर्माण के लिए नवाचार, अनुसंधान और शिक्षा पर वैश्विक संगम एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

     

    इसके पश्चात प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने सभी प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा,

    “यह मंच वैश्विक सहयोग और ज्ञान साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया  उद्घाटन समारोह के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए , पहले सत्र में  अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा  प्रस्तुतियाँ  दी गई |  एंटोनेट लेयून (कनाडा) ने सुसंगत हृदय की बुद्धिमत्ता : द न्यूरोजॉय®️ शिफ्ट पर एवं यू एस ए से आई प्रतिभागी एलिसन साल्ट्ज़मैन ने

    क्वांटम मेडिटेशन के लाभ पर पत्रवाचन किया | 

     

    दूसरे तकनीकी सत्र में सेंधिल कुमार ने एकत्व चेतना में क्वांटम टनलिंग और अवरोध और अंकुर तिवारी (भारत) ने पंचकोश फ्रेमवर्क में क्वांटम योग लागू करने के पाँच मुख्य आधार,  शिल्पा सुगतहन ने

    मानव मस्तिष्क की स्वतंत्रता की डिग्री को बढ़ाकर उच्च क्वांटम रचनात्मकता प्राप्त करने पर, मारिया फिलीपोज़, गोवा ने

    सृजनात्मकता : मिथक और विधि  के शोध पत्र उल्लेखनीय रहे | 

     सभी वक्ताओं ने सम्मेलन की थीम से संबंधित प्रभावशाली, शोध-आधारित तथा प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे प्रतिभागियों को नवीन तकनीकों, वैश्विक दृष्टिकोणों और सतत विकास के लिए आवश्यक नवाचारों को समझने का अवसर मिला।

     

    कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. अंशु सुराना ने अपने प्रेरणादायक संदेश में कहा

    “नवाचार की शक्ति को पहचानें, अनुसंधान के माध्यम से समाधान खोजें, और शिक्षा के द्वारा एक स्थायी भविष्य का निर्माण करें।”

     

    अंत में डॉ. रजनी माथुर, संयोजक, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसके साथ ही यह महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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