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    30,000 से अधिक स्टूडेंट्स और 1,000 से ज़्यादा देशभर से आए छात्रों ने जेयू रिदम 2026 में लिया हिस्सा

    2 months ago

    -'बीट्स ऑफ इमेजिनेशन': ज़ाकिर खान की जादुई कहानी और बिस्मिल की रूहानी सूफी महफिल के साथ 'रिदम 2026' में सिमटा यादों का कारवां

     

    -यूनिवर्स के 'सेफ स्पेस' में स्टूडेंट्स ने कला और 'सेल्फ-लव' के ज़रिए मानसिक स्वास्थ्य को दी नई परिभाषा

     

    जयपुर,

     

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में शुरू हुआ नॉर्थ इंडिया का सबसे बड़ा टैक्नो-मीडिया-स्पोर्ट्स एवं कल्चरल फ़ेस्ट, रिदम 2026

     

    जोश से भरे जेयू रिदम में देश के कोने कोने से आए 1000 से अधिक स्टूडेंट्स ने 50 से ज्यादा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया| 30,000 से अधिक स्टूडेंट्स की मौजूदगी और टीम्स के लगातार जुड़ने का सिलसिला यह साफ़ दर्शाता है कि रिदम का जुनून न केवल जेईसीआरसीयंस में है, बल्कि पूरे भारत के युवाओं के बीच बढ़ रहा है।

     

    फेस्ट में मेंटल हेल्थ और 'सेल्फ-लव' के प्रति जागरूक करने के लिए 'सेफ स्पेस' प्रदान किया जहाँ कैंडल मेकिंग, पॉटरी, ब्लॉक प्रिंटिंग और फेस पेंटिंग जैसी आर्ट-बेस्ड एक्टिविटीज़ द्वारा इमोशंस को कला के ज़रिए व्यक्त किया गया।

     

    वहीं स्टेज पर 'जेयू शोडाउन', 'जेयू वर्स' और 'बैटल ऑफ बैंड्स' जैसी प्रतियोगिताओं में देश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ के बीच एक कड़ा मुकाबला देखने को मिला। डांस फ्लोर पर कलाकारों ने बोल्ड और लाउड एक्सप्रेशंस के साथ ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के संघर्ष और उनकी शिक्षा की ज़रूरत को दर्शाया। जो यूनिवर्सिटी के उस समावेशी विज़न को दर्शाता है जहाँ शिक्षा का अधिकार केवल जेंडर तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए है। इसके साथ ही चरी और घूमर जैसे फोक डांस ने राजस्थान के कल्चर को मॉडर्न फ्यूज़न और परफेक्ट सिंक के साथ पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध करा।

     

    इस ईयरली फ़ेस्ट की शुरुआती शाम ज़ाकिर खान के नाम रही, जिन्होंने अपने बेबाक अंदाज़ और कहानियों से पूरे कैंपस के साथ एक गहरा जुड़ाव बनाया। उन्होंने अपने मशहूर 'सख्त लौंडा' फलसफे के साथ-साथ जीवन के संघर्षों, रिश्तों की बारीकियों और आत्म-सम्मान पर आधारित अपनी 'हक से' वाली फिलॉसफी को साझा कर वाइब्स को दोगुना किया। उन्होंने अपनी सिग्नेचर लाइन 'जो महसूस करता हूँ, वही कहता हूँ' के माध्यम से हंसी-मज़ाक बीच युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और व्यक्तित्व में ईमानदारी रखने की सीख दी। ज़ाकिर की यह प्रस्तुति महज़ एक स्टैंड-अप एक्ट नहीं थी, बल्कि यह उनके जीवन के अनुभवों का एक ऐसा साझा सफर था जिसे पार्टिसिपेंट्स ने एक यादगार 'वन्स-इन-ए-लाइफटाइम' प्रेरणा के रूप में आत्मसात किया।

     

    जहाँ एक ओर कॉमेडी पंचलाइंस से ऑडियंस लोटपोट हो रहीं थी, वहीं दूसरी ओर जेईसीआरसी फ़ाउंडेशन के ‘रेनैसांस’ के मंच पर 'बिस्मिल की महफ़िल' ने "तेरे बिन नहीं लगदा", "छाप तिलक" और "आफरीन आफरीन" जैसे रूहानी कलामों और अपने सिग्नेचर सूफी-फ़्यूजन ट्रैक से फ़िज़ा सजाई। इसके साथ ही, सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी को निभाते हुए जेईसीआरसी सेंटर फ़ॉर सस्टैनेबिलिटी (जेसीएस) ने यूनिवर्सिटी के कमिटमेंट को रिफ्लेक्ट किया। प्लास्टिक रीसायकलिंग, पेपर पॉपर्स और इको-फ्रेंडली डेकोर के जरिए फ़ेस्ट को एनवायर्नमेंटल फ़्रेंडली बनाया।

     

    यूनिवर्सिटी के वाइस-चेयरपर्सन, अर्पित अग्रवाल ने इस पूरे आयोजन को एक 'कंट्रोल फेल्योर लेबोरेटरी' के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि यह कैंपस स्टूडेंट्स के लिए प्रयोग करने और अपनी गलतियों से सीखकर लीडरशिप के गुर सीखने का एक सुरक्षित मंच है। 

     

    वहीं, डायरेक्टर (डिजिटल स्ट्रेटेजीज़), धीमांत अग्रवाल ने गर्व के साथ साझा किया कि 'रिदम' अब एक नेशनल ब्रांड बन चुका है, जहाँ टीम का मॉडर्न अप्रोच और बेहतरीन वैल्यूज़ का तालमेल ही इसे देश के बेहतरीन फेस्टिवल्स की श्रेणी में खड़ा करता है।

     

    साथ ही, आगामी दो दिनों में फ़रहान अख़्तर की बहुप्रतीक्षित लाइव परफॉरमेंस और हाई-वोल्टेज टेक्निकल इवेंट्स के साथ 'रिदम 2026' सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने को पूरी तरह तैयार है।

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