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    भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील विषय पर न्यायपालिका की सक्रियता सराहनीय, अब एक समान पाठ्यक्रम पर भी हो संज्ञान — संयुक्त अभिभावक संघ

    3 months ago

    जयपुर। संयुक्त अभिभावक संघ ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तकों में प्रकाशित भ्रष्टाचार संबंधी अध्याय पर संज्ञान लेकर दिए गए निर्देशों का स्वागत किया है। संघ का मानना है कि यह निर्णय न केवल शिक्षा की गुणवत्ता और संवेदनशीलता को लेकर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बच्चों को पढ़ाई जाने वाली सामग्री के सामाजिक, नैतिक और मानसिक प्रभावों को लेकर न्यायपालिका सजग है।

     

    संघ ने कहा कि जिस प्रकार न्यायपालिका ने भ्रष्टाचार जैसे विषय को लेकर पाठ्यक्रम की सामग्री, प्रस्तुति और प्रभाव पर गंभीरता दिखाई है, उसी प्रकार सरकारी एवं निजी स्कूलों में एक समान पाठ्यक्रम (कॉमन करिकुलम) लागू करवाने के प्रश्न पर भी न्यायिक संज्ञान लिया जाना चाहिए। वर्तमान में अलग-अलग बोर्ड, निजी प्रकाशन और स्कूल-स्तरीय पाठ्यक्रमों के कारण विद्यार्थियों में असमानता, भ्रम और प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर बच्चों और अभिभावकों पर पड़ता है।

     

    संयुक्त अभिभावक संघ का स्पष्ट मत है कि शिक्षा का अधिकार केवल प्रवेश तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समान, संतुलित और गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम भी उसका अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। यदि देशभर में एक समान पाठ्यक्रम लागू होता है तो इससे न केवल शैक्षणिक असमानता घटेगी, बल्कि कोचिंग संस्कृति, महंगी निजी पुस्तकों और स्कूलों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा।

     

     

    *प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि -* “न्यायपालिका द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तक में भ्रष्टाचार जैसे अध्याय पर संज्ञान लेना स्वागतयोग्य कदम है। यह दिखाता है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अदालतें गंभीर हैं। हमारा आग्रह है कि इसी संवेदनशीलता के साथ न्यायपालिका सरकारी और निजी स्कूलों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करवाने के विषय पर भी संज्ञान ले। जब शिक्षा सबके लिए है, तो पाठ्यक्रम में भेदभाव क्यों? एक देश, एक शिक्षा नीति और एक समान पाठ्यक्रम ही विद्यार्थियों के साथ वास्तविक न्याय है।”

     

    संयुक्त अभिभावक संघ ने केंद्र व राज्य सरकारों से भी मांग की है कि वे न्यायपालिका के मार्गदर्शन में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त असमानताओं को दूर करने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाएं, ताकि हर बच्चे को समान अवसर और समान शिक्षा मिल सके।

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