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    मरूभूमि में खजूर की खेती का कमाल : 270 पौधों से बदली किसान की तकदीर

    4 hours ago

    मंत्री बोले- "जल संरक्षण और जीरो बजट फार्मिंग का यह मॉडल प्रदेश के लिए प्रेरणा "

    जयपुर। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली जिले की सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के खोड़ मण्डल स्थित खैरोफड़ा ग्राम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसान द्वारा विकसित किए गए प्राकृतिक खेती आधारित खजूर के बाग का गहन निरीक्षण किया। मंत्री ने वहां अपनाई जा रही आधुनिक कृषि पद्धति, उन्नत जल प्रबंधन और उत्पादन व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने इसे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय और प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

     

    5 वर्ष की मेहनत लाई रंग, सालाना आय ₹10 लाख

    निरीक्षण के दौरान उपस्थित प्रगतिशील कृषक ने मंत्री कुमावत को बताया कि लगभग 5 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने खेत में खजूर के 270 पौधे लगाए थे। बेहतर देखरेख और सही प्रबंधन के चलते आज ये सभी पौधे पूरी तरह विकसित होकर फल देने लगे हैं। किसान ने बताया कि खजूर के इस बाग से अब उन्हें प्रतिवर्ष लगभग ₹10 लाख की शानदार वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस सफलता को देख कैबिनेट मंत्री ने किसान के प्रयासों की पीठ थपथपाई।

     

    बूंद-बूंद सिंचाई और प्राकृतिक खाद का अनूठा संगम

    इस कृषि मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। कृषक द्वारा बाग में बूंद-बूंद (ड्रिप) सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का समुचित और किफायती उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही, पौधों को पोषण देने के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया जा रहा है। इस दोहरे प्रबंधन से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर खेती की लागत कम होकर यह अधिक लाभकारी साबित हो रही है।

     

    क्षेत्र के किसानों के लिए बनेगा रोल मॉडल

    मंत्री कुमावत ने कहा कि सीमित पानी में प्राकृतिक तरीके से खजूर की खेती करना कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है। प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सटीक कृषि प्रबंधन का यह अनूठा प्रयास मरूभूमि के लिए वरदान है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखता है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को भी पूरा करता है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और स्थानीय किसानों से इस सफल प्रयोग को देखने और सीखने का आह्वान किया ताकि क्षेत्र में बागवानी को और बढ़ावा दिया जा सके।

     

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