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    एआई के इस दौर में पीयर-लर्निंग और व्यावहारिक ज्ञान ही है सबसे बड़ा एसेट- सार्थक अहूजा, जेईसीआरसी ओरिएंट

    2 hours ago

    -एंटरप्रेन्योर्स ने 'बिल्डर्स माइंडसेट' पर की चर्चा, कॉलेज के पहले साल से ही समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने की दी सलाह

    जयपुर,

    "सफलता कभी उपहार में नहीं मिलती, बल्कि वह तो लगातार की गई मेहनत से गढ़ी जाती है।" इसी विचार के साथ जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के 'ओरिएंट 2026' के आखरी दिन छात्रों को 'ओवरनाइट सक्सेस' के भ्रम को तोड़कर असली 'ग्राइंड' की अहमियत समझाई गई। इस एआई और डिजिटल एरा की डायनामिक दुनिया में टिके रहने के लिए निरंतर खुद को 'अपस्किल' करना, नया सीखना और अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर प्रयोग करने को असली गेम-चेंजर बताया गया।

    जेईसीआरसी के डिजिटल स्ट्रेटजीज डायरेक्टर धीमांत अग्रवाल और विख्यात फाइनेंशियल एजुकेटर, इन्वेस्टमेंट बैंकर एवं ऑथर सार्थक अहूजा के बीच स्टूडेंट लाइफ, इकोनॉमी और करियर डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। सत्र का आगाज़ करते हुए धीमांत अग्रवाल ने 28 राज्यों से आए छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए पूछा कि ₹5,000 जैसी सीमित पॉकेट मनी में छात्र अपना वित्तीय संतुलन कैसे बनाएं। इस पर सार्थक आहूजा ने स्पष्ट किया कि छात्र जीवन में बचत से अधिक प्राथमिकता खुद पर निवेश को दी जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस राशि का 20 प्रतिशत भाग (तकरीबन ₹1,000) हर महीने अपनी लर्निंग, स्किल डेवलपमेंट और नए अनुभवों में लगाना चाहिए, क्योंकि एआई के इस दौर में पीयर-लर्निंग और व्यावहारिक ज्ञान ही सबसे बड़ा एसेट है।

    वहीं, मेट्रोपोलिटन शहरों के मुकाबले टियर 2-टियर 3 सिटीज़ में करियर और प्लेसमेंट की संभावनाओं पर बात करते हुए सार्थक ने जयपुर को देश का सबसे तेज़ी से उभरता टियर-2 शहर करार दिया। उन्होंने बहती नदी का उदाहरण देते हुए समझाया कि दिल्ली या मुंबई जैसे मैच्योर शहरों में अत्यधिक महंगाई के कारण वास्तविक बचत कम रह जाती है। इसके विपरीत, जयपुर वर्तमान में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ आगामी तीन वर्षों में रोजगार के अवसर दोगुनी रफ्तार से बढ़ेंगे, जिससे कम लागत में बेहतर लाइफस्टाइल और तेज़ करियर ग्रोथ मिलना तय है।

    इसी कड़ी में, धीमांत अग्रवाल ने छात्रों की दिनचर्या को ध्यान में रखते हुए रोज़ाना खुद को अपडेट रखने और सीखने के प्रभावी माध्यमों पर मार्गदर्शन दिया। डिग्रियां या परीक्षा के अंकों को सफलता का वास्तविक मापदंड नहीं मानते हुए सार्थक ने स्टूडेंट्स को प्रेरित किया कि वे प्रतिदिन सीखी गई किसी एक नई बात को रिकॉर्ड करें, सबस्टैक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिकल्स पढ़ें और अपनी जिज्ञासा को आदत बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतरता और कंपाउंडिंग की शक्ति से अर्जित की गई स्किल्स ही भविष्य में एआई की चुनौतियों का मुकाबला कर सकती हैं।

    इसी तरह, 'बिल्डर्स माइंडसेट' और जनरेटिव एआई के भविष्य पर चर्चा करते हुए अर्जुन वैद्य (फ़ाउंडर व इन्वेस्टर) और निवेदन राठी (एआई स्ट्रेटेजिस्ट व एंटरप्रिन्योर) ने छात्रों को समस्याओं की पहचान कर उनका व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों से डरने के बजाय इन्हें काम को आसान बनाने और नया सीखने के सशक्त माध्यम के रूप में अपनाना चाहिए- हालांकि इसके इस्तेमाल में डेटा गोपनीयता के प्रति सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। अपने निजी व्यावसायिक अनुभवों को साझा करते हुए, उन्होंने ने स्टूडेंट्स को कॉलेज के पहले साल से ही प्रॉब्लम-सॉल्विंग अप्रोच, नवाचार और सही तकनीकों का इस्तेमाल कर आगे बढ़ने की सलाह दी।

    अपने सत्र में पूर्व आईएस अधिकारी, लेखक और लीडरशिप एक्सपर्ट विवेक अत्रे ने छात्रों को जीवन में स्पष्टता, इमोशनल इंटेलिजेंस और मजबूत जीवन मूल्यों की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि असली सफलता केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि सही एटीट्यूड, अनुशासन और शांत मन से हासिल होती है। साथ ही छात्रों को तनावमुक्त रहकर सीखने, अपनी लीडरशिप स्किल्स को निखारने और करियर के साथ एक बेहतर इंसान बनने का मूलमंत्र दिया।

    युवाओं में नया जोश भरते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कॉलेज को बिना किसी झिझक के सीखने, नए प्रयोग करने और स्वयं को बेहतर बनाने का सबसे उपयुक्त मंच बताया। उन्होंने छात्रों को नए रास्ते चुनने, अपनी रुचि के क्षेत्र में निडर होकर आगे बढ़ने तथा डिजिटल सुरक्षा और सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की यही साहसी और जिम्मेदार सोच आगे चलकर एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार बनती है।

    अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों के योगदान पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का जीवन जितना दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। शिक्षक घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ विश्वविद्यालय आकर विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, उनकी शंकाओं का समाधान करते हैं, असाइनमेंट्स का मूल्यांकन करते हैं और फिर घर लौटकर अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। इसके बावजूद वे पूरे समर्पण और धैर्य के साथ समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं।

    अर्पित अग्रवाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का सबसे श्रेष्ठ और सबसे सम्मानित पेशा है। जो व्यक्ति अध्यापन को चुनता है, वह केवल अपना करियर नहीं बनाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारने का संकल्प लेकर इस क्षेत्र में आता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करें, उनसे अधिक से अधिक सीखें और उनके अनुभवों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आने वाले वर्षों में आपके शिक्षक ही आपके सबसे बड़े मार्गदर्शक होंगे, जो आपको सही दिशा दिखाएंगे और जीवन के हर महत्वपूर्ण निर्णय में आपका साथ देंगे।

    ज्ञान और प्रेरणा से भरे इस दिन का समापन लाइव बैंड परफॉर्मेंस के साथ हुआ, जिसने छात्रों को ऊर्जा और अमिट यादों से सराबोर किया।

     

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