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    राजस्थान विश्वविद्यालय के राजस्थान अध्ययन केंद्र में "राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवम इतिहास " विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

    2 hours ago

    राजस्थान विश्वविद्यालय के राजस्थान अध्ययन केंद्र में "राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवम इतिहास " विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

    संगोष्ठी की शुरुआत मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में की गई। विद्या की देवी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कुलगुरू प्रोफेसर भगवती प्रसाद सारस्वत ने अतिथियों का साफा एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ दीपिका विजयवर्गीय ने अपने स्वागत उद्बोधन के माध्यम से बताया कि मरुधरा महज एक भौगोलिक क्षेत्र मात्र नहीं है बल्कि ये एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना है जिसकी अनवरत यात्रा सदियों से जारी है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ रहे। उन्होनें अपने संबोधन में बताया कि युग,माध्यम और अभिव्यक्ती बदलने के बावजूद भी भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी विश्व का नेतृत्व कर रही है। राजस्थान का लोक साहित्य पीढ़ियों के अनुभव का संग्रह है जिसे विश्व पटल पर विभिन्न माध्यमों से पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कर्तव्य व सह अस्तित्व की दृष्टि ही हमारी सभ्यता की पूंजी है। हमें अपनी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए विरासत और विकास, परंपरा और प्रगति को साथ लेकर चलना होगा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता RSS प्रांत प्रचारक बाबूलाल रहें जिन्होंने अपने संबोधन में लोक की पहचान करने के तीन तत्व बताये- वाणी,पाणी एवं इला। उन्होंने बताया कि राजस्थान के लोक,इतिहास, संस्कृति,विरासत को समझने के लिए मायड़ भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। मायड़ भाषा युवाओं को अपने स्व के प्रति जागरूक करती है और अपनी जड़ों से जोड़कर रखती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रोफेसर भगवती प्रसाद सारस्वत ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि अपने लोक साहित्य, संस्कृति और इतिहास से विमुख समाज पतनशील होता है। देश की युवा पीढ़ी को अपने महापुरुषों और वीरांगनाओं के इतिहास से अवगत होना चाहिए। कई शिक्षाविद् और विद्यार्थी मौजूद रहे।

     

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