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    संसद में पेपर लीक कानून पर घमासान, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार- विपक्ष आमने-सामने

    2 hours ago

     
     

    युगचरण न्यूज़ / 27-07-2026

    संसद के मानसून सत्र का सोमवार का दिन भारी हंगामे, तीखी राजनीतिक बयानबाज़ी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम विधेयक पर टकराव के नाम रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और बिहार में कथित रूप से हथियारों के प्रयोग के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। वहीं सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया।

    दिनभर विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की, जबकि सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लाए गए विधेयक पर चर्चा कराने की अपील की। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

    पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन विधेयक पेश

    लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। सरकार का कहना है कि यह संशोधन परीक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने और सार्थक बहस में भाग लेने की अपील की।

    हालांकि विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के चलते विधेयक पेश होने के कुछ ही मिनटों बाद लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में शाम पांच बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

    छात्र आंदोलन पर सरकार से जवाब मांगता विपक्ष

    संसद में विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को प्रमुख मुद्दा बनाया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।

    कांग्रेस नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से सदन में विस्तृत बयान देने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किए जाने के आरोप गंभीर हैं और इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।

    कई विपक्षी सांसदों ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए मामलों की समीक्षा की जाए और यदि निर्दोष छात्रों पर कार्रवाई हुई है तो उन्हें राहत दी जाए।

    सरकार ने परीक्षा सुधारों को बताया प्राथमिकता

    सरकार की ओर से भारतीय जनता पार्टी के कई सांसदों ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना समय की आवश्यकता है।

    बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और यह विधेयक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार सरकार ने पहले ही विशेषज्ञ समिति का गठन किया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    सत्ता पक्ष के अन्य नेताओं ने भी कहा कि कठोर कानूनी प्रावधान परीक्षा माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे और ईमानदार छात्रों का विश्वास मजबूत करेंगे।

    विपक्ष ने विधेयक को बताया अधूरा समाधान

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संशोधन विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल अस्थायी समाधान है। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार चाहती है तो उसे संपूर्ण शिक्षा प्रणाली से जुड़े मूलभूत मुद्दों पर व्यापक कानून लाना चाहिए।

    अन्य विपक्षी नेताओं ने भी आरोप लगाया कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार परीक्षा संस्थाओं में पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधारों पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

    धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर बढ़ा राजनीतिक विवाद

    पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर एनडीए सांसदों द्वारा उनका स्वागत किए जाने से भी राजनीतिक विवाद गहरा गया। संसद परिसर में कुछ सांसदों ने उनके समर्थन में नारे लगाए, जिसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    विपक्ष का कहना था कि हाल के घटनाक्रम के बाद इस प्रकार का स्वागत गलत संदेश देता है। वहीं एनडीए नेताओं ने इसे राजनीतिक समर्थन और व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक बताया।

    इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच संसद के भीतर और बाहर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली।

    अमित शाह के बयान की मांग तेज

    कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल लगातार गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग करते रहे। विपक्ष का आरोप है कि छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार को सदन में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, के.सी. वेणुगोपाल सहित कई नेताओं ने कहा कि यदि कहीं भी अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी कहा कि सरकार को छात्रों पर दर्ज मामलों की जानकारी सदन में देनी चाहिए।

    हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सदन में सामने नहीं आई।

    संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित

    दिनभर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। अध्यक्ष ओम बिरला ने कई अवसरों पर सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और संसद का समय सार्थक बहस में व्यतीत होना चाहिए।

    राज्यसभा की कार्यवाही भी कई बार स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में भी अध्यक्ष ने विपक्ष से शाम के सत्र में विधेयक पर चर्चा में भाग लेने का अनुरोध किया।

    एनडीए की संसदीय बैठक आज

    इस बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मंगलवार को अपनी नियमित संसदीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि बैठक में संसद की रणनीति, विपक्ष के आरोपों और पेपर लीक संशोधन विधेयक को लेकर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, छात्र आंदोलनों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बहस और तेज हो सकती है।

    आगे की राह

    मानसून सत्र के दौरान सरकार की प्राथमिकता परीक्षा सुधार संबंधी विधेयक को पारित कराना है, जबकि विपक्ष छात्र आंदोलनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई, युवाओं के मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को प्रमुखता से उठा रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में संसद में इन दोनों मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। यदि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलती है तो पेपर लीक रोकने से जुड़े प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर विस्तृत बहस के साथ विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर भी सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ सकता है।

    फिलहाल, संसद का मानसून सत्र शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकार, परीक्षा सुधार और राजनीतिक जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता दिखाई दे रहा है, जिनका प्रभाव आने वाले समय में देश की नीतियों और लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।

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