Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में दीक्षारम्भ नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला संस्कार और संकल्प का मंत्र, विद्या के साथ संस्कार और जीवन का लक्ष्य जरूरी प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

    1 hour ago

    जयपुर. 

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में सोमवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय मुख्यालय के साथ देशभर के जयपुर सहित विभिन्न परिसरों से नवप्रवेशित विद्यार्थी आभासीय माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. डी. दयानाथ के वैदिक मंगलाचरण से हुई। छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई दी तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र कल्याण गतिविधियों, सुविधाओ एवं अवसरो की जानकारी दी।

    विद्या ही मनुष्य का द्वितीय जन्म

    कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माता के गर्भ से जन्म लेने पर मनुष्य को शरीर प्राप्त होता है, जबकि विद्या और संस्कार से उसका द्वितीय जन्म होता है। विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी निर्मल एवं जिज्ञासु मन से शिशुवत भाव लेकर ज्ञान की साधना करें। उन्होंने कहा कि विद्या केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा, श्रवण, मनन, अनुशीलन और निरंतर प्रयास से अर्जित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिस प्रकार माता-पिता के प्रति श्रद्धा होती है, उसी प्रकार अपने आचार्यों और गुरुओं के प्रति भी श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए। संस्कृत माध्यम से अध्ययन करते हुए विद्यार्थी ज्ञान के साथ संस्कार भी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणों को अपनाते हुए अवगुणों और दोषों का त्याग करना चाहिए तथा सही-गलत का विवेक करते हुए सदैव उचित मार्ग को स्वीकार करना चाहिए।

    पहले दिन से तय करें जीवन का लक्ष्य

    कुलपति प्रो.वरखेड़ी ने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का लक्ष्य पहले दिन से निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ें। नियमित अध्ययन, पुस्तकों की तैयारी, अनुशासन और निरंतर अभ्यास विद्यार्थी जीवन की सफलता का आधार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल शास्त्रों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन और जीविका के लिए भी सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं को एक श्रेष्ठ शिल्प की तरह तैयार करें। ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि नए विद्यार्थी अब विश्वविद्यालय के व्यापक परिवार का हिस्सा हैं और यहां उन्हें नए परिवेश, नए मित्रों तथा नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुलपति ने विद्यार्थियों को सफलता का सूत्र देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य “छात्र भी, शास्त्र भी, जीवन भी और जीविका भी” के समन्वय के साथ आगे बढ़ना होना चाहिए।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी तथा प्रो. कुलदीप शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परम्परा, अनुशासन एवं अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला।

    इस अवसर पर परियोजना अधिकारी डॉ. विजय दाधीच, उपनिदेशक शैक्षणिक डॉ. देवानंद शुक्ल, डॉ. योगेन्द्र दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार बुटोलिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नारायण आरएल सिम्हा ने किया।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    व्यापारियों के लिए medeation सहायक...जस्टिस शुक्ला
    Next Article
    बदलते दौर में डिग्री के साथ स्किल्स, एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप जरूरी: डॉ. किरण बेदी

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment