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    वैदिक संस्कृति संवर्द्धन हेतु ऐतिहासिक सहयोग; राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान में यज्ञ पात्रों के लिए सुप्रीम फ़ाउंडेशन, जसवंतगढ़ ने ₹2.25 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत

    6 hours ago

    जयपुर। उच्च शिक्षा, शोध तथा प्राचीन भारतीय मन्त्र एवं वैदिक परंपरा के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर स्थित राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान और सुप्रीम फ़ाउंडेशन, जसवंतगढ़ के मध्य अनुकरणीय अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग स्थापित हुआ है। इस सहयोग के अंतर्गत सुप्रीम फ़ाउंडेशन द्वारा राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान की यज्ञशाला के लिए श्रौत एवं स्मार्त परंपरा के यज्ञ पात्रों के क्रय एवं निर्माण हेतु ₹2,25,000/- (दो लाख पच्चीस हजार रुपये) की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

    विश्वविद्यालय के कुलगुरु एवं राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के संरक्षक प्रो. मदन मोहन झा ने इस सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक युग में वेदों, मन्त्रों और यज्ञीय परंपराओं के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक स्वरूप के संरक्षण तथा पुनर्जीवन के लिए सामाजिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महावीर प्रसाद तापड़िया एवं सुप्रीम फ़ाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

    राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि मन्त्र विज्ञान और वैदिक कर्मकाण्ड में यज्ञ तथा आहुतियों की शास्त्रोक्त सम्पन्नता के लिए निर्धारित उपकरणों एवं यज्ञ पात्रों का विशेष महत्व है। श्रौत एवं स्मार्त परंपरा के अनुरूप निर्मित इन पवित्र यज्ञ पात्रों की उपलब्धता से प्रतिष्ठान में आयोजित होने वाले शोधपरक अनुष्ठानों, वैदिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विविध यज्ञीय आयोजनों को अधिक व्यवस्थित एवं शास्त्रीय विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया जा सकेगा।

    विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सुप्रीम फ़ाउंडेशन के संस्थापक तापड़िया परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एवं सामाजिक संस्थाओं के मध्य इस प्रकार का सहयोग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्द्धन और उसके समकालीन पुनर्पाठ की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस अवसर पर सेठ सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमंतकृष्ण मिश्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उपस्थित विद्वानों एवं अतिथियों ने इस सहयोग को भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems—IKS) के संवर्द्धन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) की भावना के अनुरूप एक प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल बताया।

    उल्लेखनीय है कि राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान वैदिक मन्त्र विज्ञान, यज्ञीय परंपरा, शास्त्रीय अनुसंधान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए निरंतर कार्यरत है। सुप्रीम फ़ाउंडेशन, जसवंतगढ़ द्वारा प्रदान की गई यह आर्थिक सहायता प्रतिष्ठान की यज्ञशाला को आवश्यक शास्त्रोक्त संसाधनों से समृद्ध करने के साथ-साथ वैदिक ज्ञान परंपरा के अध्ययन, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं यज्ञीय अनुष्ठानों को नई गति प्रदान करेगी। यह सहयोग विश्वविद्यालय और समाज के संयुक्त प्रयासों से भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

     

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